8. महत्त्वपूर्ण फलों के रोग कारण, लक्षण एवं नियंत्रण (Causes, Symptoms and control of important fruit disease)
इस पेज पर आपको 8. महत्त्वपूर्ण फलों के रोग कारण, लक्षण एवं नियंत्रण (Causes, Symptoms and control of important fruit disease) के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), परीक्षा उपयोगी नोट्स और ऑनलाइन क्विज़ मिलेंगे। अपने ज्ञान का परीक्षण करने और बोर्ड/प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मॉक टेस्ट में अवश्य भाग लें।
👉 अध्याय का सारांश (Summary)
प्रिय विद्यार्थियों, कृषि जीव विज्ञान के इस बेहद ही रोचक और उपयोगी अध्याय 'महत्त्वपूर्ण फलों के रोग कारण, लक्षण एवं नियंत्रण' (Causes, Symptoms and control of important fruit disease) में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। हम सभी को ताजे और मीठे फल खाना बहुत पसंद होता है। फल न केवल हमारे स्वास्थ्य और पोषण के लिए आवश्यक हैं, बल्कि फल उत्पादन (Horticulture) हमारे किसानों की आय का एक बहुत बड़ा और स्थायी स्रोत भी है। लेकिन जिस तरह अनाज वाली फसलों को बीमारियां लगती हैं, ठीक उसी तरह फलों के बागीचों में भी विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव भयंकर बीमारियां फैलाते हैं, जिससे फलों की गुणवत्ता और उपज दोनों बुरी तरह से प्रभावित होती हैं। इस अध्याय में हम बागवानी की प्रमुख फसलों में लगने वाले इन घातक रोगों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
आइए इसे समझने के लिए कुछ दैनिक जीवन के व्यावहारिक उदाहरण लेते हैं। आप जब भी बाजार से नींबू खरीदते हैं, तो कभी-कभी आपने देखा होगा कि नींबू के पीले छिलके पर भूरे रंग के खुरदरे, कॉर्क जैसे उभरे हुए धब्बे बने होते हैं। ये धब्बे केवल फल पर ही नहीं बल्कि पेड़ की पत्तियों और टहनियों पर भी दिखाई देते हैं। यह नींबू का बहुत ही प्रसिद्ध 'कैंकर रोग' (Citrus canker) है, जो एक जीवाणु (Bacteria) के कारण फैलता है। इसी प्रकार, यदि आपके घर के आस-पास अमरूद का कोई पेड़ है, तो आपने शायद कभी गौर किया हो कि पूरा का पूरा हरा-भरा पेड़ अचानक से ऊपर से नीचे की तरफ सूखने लगता है और उसकी पत्तियां मुरझा कर गिरने लगती हैं। इसे अमरूद का 'म्लानि या उकठा रोग' (Guava wilt) कहते हैं, जो मिट्टी में मौजूद एक फफूंद के कारण होता है। ये बीमारियां रातों-रात पूरे के पूरे फलों के बागीचे को बर्बाद करने की क्षमता रखती हैं।
इस अध्याय में हम नींबू के कैंकर रोग, अमरूद के म्लानि रोग और बेर के छाछ्या रोग (Powdery mildew of Ber) के बारे में बहुत ही गहराई से पढ़ेंगे। हम यह जानेंगे कि ये बीमारियां किस रोगकारक (Pathogen) के कारण होती हैं, इनके प्राथमिक और द्वितीयक लक्षण क्या हैं, और ये बीमारियां एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक कैसे फैलती हैं। इसके अलावा, एक सफल किसान बनने के लिए सबसे जरूरी है इन रोगों का सही नियंत्रण। हम रोग नियंत्रण की विभिन्न विधियों जैसे संक्रमित टहनियों की कटाई-छंटाई (Pruning), बोर्डो मिश्रण (Bordeaux mixture) का उपयोग, और रोग प्रतिरोधी किस्मों के रोपण जैसी महत्वपूर्ण रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा करेंगे।
NCERT और RBSE बोर्ड परीक्षा 2027 की शानदार तैयारी के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपकी बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर फलों के इन रोगों के कारण, लक्षण और उनके रासायनिक नियंत्रण से संबंधित Objective questions in hindi पूछे जाते हैं। आपको जीवाणु जनित रोगों और कवक जनित रोगों के लक्षणों के बीच का अंतर बहुत ही बारीकी से समझना होगा। आपकी इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए, हमने एक बहुत ही उच्च गुणवत्ता वाला ऑनलाइन टेस्ट तैयार किया है। इन बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) का लगातार अभ्यास करने से आपके सभी कांसेप्ट बिल्कुल स्पष्ट हो जाएंगे। यह ऑनलाइन क्विज़ आपको न केवल बोर्ड परीक्षा में 100% अंक प्राप्त करने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में कृषि क्षेत्र की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा। तो चलिए, फलों को सुरक्षित रखने के इस विज्ञान को पूरी लगन के साथ सीखते हैं।
विशेषता: यह एक 3-Level आधारित यूनीक क्विज़ है। अगले स्तर (Level 2 और 3) को अनलॉक करने के लिए छात्रों को वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक स्कोर करने होंगे, जो उनकी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को 100% मजबूत बनाता है।
अध्याय के सभी प्रश्न (Revision Notes)
*नोट: यह सेक्शन रिवीजन के लिए है। अपना ज्ञान परखने के लिए ऊपर दिए गए क्विज़ में भाग लें।
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नींबू के 'गैमोसिस' (Gummosis) रोग का मुख्य लक्षण क्या है?
A) पत्तियां पीली होना | B) तने की छाल से गोंद जैसा पदार्थ निकलना | C) जड़ सूखना | D) फल गिरना -
नींबू के गैमोसिस रोग का कारक कवक कौन सा है?
A) फाइटोफ्थोरा प्रजाति (Phytophthora) | B) अल्टरनेरिया | C) फ्यूसेरियम | D) कोई नहीं -
आम का 'झुलसा' (Anthracnose) रोग किस कवक द्वारा होता है?
A) कोलेटोट्राइकम ग्लोओस्पोरियोइड्स | B) फ्यूसेरियम | C) क्लेविसेप्स | D) कोई नहीं -
आम के 'गुच्छा-मुच्छा' (Malformation) रोग में पुष्पक्रम कैसा हो जाता है?
A) लंबा | B) सघन, छोटा और मांसल गुच्छे जैसा | C) सफेद चूर्ण युक्त | D) सूखा -
नींबू के गैमोसिस रोग के नियंत्रण हेतु तने पर किसका लेप लगाया जाता है?
A) यूरिया | B) बोरडॉक्स पेस्ट (Bordeaux Paste) | C) नमक | D) मिट्टी -
आम के झुलसा रोग के धब्बे पत्तियों पर कैसे दिखाई देते हैं?
A) सफेद | B) भूरे-काले और अनियमित | C) पीले | D) नीले -
आम के गुच्छा-मुच्छा रोग को फैलाने में कौन सा कीट (Mite) सहायक है?
A) सफेद मक्खी | B) आम का घुन (Mango Bud Mite) | C) टिड्डी | D) मधुमक्खी -
नींबू के बगीचे में जल निकास (Drainage) खराब होने पर कौन सा रोग बढ़ता है?
A) कैंकर | B) गैमोसिस | C) मोजेक | D) कोई नहीं -
आम का झुलसा रोग किस मौसम में अधिक फैलता है?
A) शुष्क गर्मी | B) अधिक आर्द्रता और वर्षा वाला मौसम | C) कड़ाके की ठण्ड | D) हमेशा -
गैमोसिस रोग में तने की छाल कैसी हो जाती है?
A) चिकनी | B) सड़कर फटने लगती है | C) हरी | D) सख्त -
आम के गुच्छा-मुच्छा रोग के प्रबंधन हेतु 'नफ्थलीन एसिटिक एसिड' (NAA) की कितनी मात्रा उपयोग करते हैं?
A) 10 ppm | B) 200 ppm | C) 1000 ppm | D) 50 ppm -
नींबू के पौधों के चारों ओर पानी के भराव को रोकने हेतु कौन सी विधि अपनानी चाहिए?
A) खुली विधि | B) रिंग या थाला विधि (Ring method) | C) बाढ़ विधि | D) कोई नहीं -
आम के झुलसा रोग के नियंत्रण हेतु प्रभावी कवकनाशी है:
A) बोरडॉक्स मिश्रण या मैन्कोजेब | B) यूरिया | C) जिप्सम | D) नमक -
गुच्छा-मुच्छा रोग से प्रभावित पुष्पक्रम में क्या नहीं बनते?
A) पत्तियां | B) फल (Fruits) | C) शाखाएं | D) जड़ -
गैमोसिस रोग के कारण अंततः पौधा क्या हो जाता है?
A) तेजी से बढ़ता है | B) धीरे-धीरे सूखकर मर जाता है | C) हरा बना रहता है | D) कोई नहीं -
नींबू के गैमोसिस रोग का कवक मिट्टी में किस रूप में जीवित रहता है?
A) बीजाणु | B) ओस्पोर्स या कवक जाल | C) अण्डा | D) कोई नहीं -
आम के झुलसा रोग के कारण फलों के भण्डारण (Storage) पर क्या असर पड़ता है?
A) फल मीठे होते हैं | B) फलों पर काले धब्बे पड़ते हैं और वे सड़ने लगते हैं | C) फल पकते नहीं | D) कोई नहीं -
आम के गुच्छा-मुच्छा रोग की खोज भारत में सबसे पहले कहाँ हुई थी?
A) बिहार (1891) | B) राजस्थान | C) पंजाब | D) तमिलनाडु -
गैमोसिस रोग के नियंत्रण हेतु बोर्डो पेस्ट में नीले थोथे और चूने का अनुपात क्या होता है?
A) 1:1 (या 1:2:10) | B) 5:5 | C) 10:10 | D) कोई नहीं -
झुलसा रोग के कवक 'कोलेटोट्राइकम' का प्राथमिक संक्रमण स्रोत है:
A) हवा | B) संक्रमित टहनियां और गिरी हुई पत्तियां | C) शुद्ध जल | D) कीट -
आम के 'वानस्पतिक गुच्छा' (Vegetative Malformation) में क्या होता है?
A) फूल बढ़ते हैं | B) शाखाओं के शीर्ष पर छोटी पत्तियों का गुच्छा बन जाता है | C) जड़ गल जाती है | D) कोई नहीं -
नींबू के गैमोसिस रोग के लिए उपयुक्त तापमान सीमा क्या है?
A) 10°C | B) 24°C - 28°C | C) 40°C | D) 0°C -
झुलसा रोग से प्रभावित टहनियों को काटकर जलाने के बाद क्या लगाना चाहिए?
A) यूरिया | B) बोरडॉक्स पेस्ट | C) नमक | D) मिट्टी -
आम के गुच्छा-मुच्छा रोग के जैविक प्रबंधन हेतु अक्टूबर माह में क्या करना चाहिए?
A) खाद डालना | B) पुष्प गुच्छों को तोड़ देना (De-blossoming) | C) अधिक सिंचाई | D) कोई नहीं -
नींबू के पौधों के मुख्य तने को मिट्टी के संपर्क से बचाने हेतु क्या करना चाहिए?
A) मिट्टी चढ़ाना | B) तने के आधार पर 'मिट्टी की ढेरी' (Mounding) बनाना | C) तने को काटना | D) कोई नहीं -
आम के झुलसा रोग के बीजाणु हवा के साथ-साथ किसके द्वारा फैलते हैं?
A) पक्षियों | B) वर्षा की बौछार (Rain splashes) | C) मिट्टी | D) कीट -
गुच्छा-मुच्छा रोग को नियंत्रित करने हेतु प्रतिरोधी किस्म का उदाहरण है:
A) दशहरी | B) इलायची या बहादुरन | C) चौसा | D) कोई नहीं -
गैमोसिस रोग की उग्रता बढ़ने पर तने की छाल कहाँ तक सड़ सकती है?
A) केवल ऊपरी भाग | B) जड़ के ऊपरी हिस्से (Bud union) तक | C) पत्तियों तक | D) कोई नहीं -
आम के झुलसा रोग के नियंत्रण हेतु छिड़काव की आवृत्ति क्या होनी चाहिए?
A) वर्ष में एक बार | B) 15 दिन के अंतराल पर 2-3 बार | C) प्रतिदिन | D) कभी नहीं -
गुच्छा-मुच्छा रोग के लिए उत्तरदायी कवक 'फ्यूसेरियम' का पूरा नाम है:
A) फ्यूसेरियम मोनिलिफोर्मी | B) फ्यूसेरियम ऑक्सीस्पोरम | C) फ्यूसेरियम सोलेनाई | D) कोई नहीं -
आम के गुच्छा-मुच्छा रोग के नियंत्रण हेतु 'NAA' का छिड़काव किस माह में करना चाहिए?
A) जून | B) अक्टूबर | C) दिसंबर | D) मार्च -
गैमोसिस रोग के प्रति नींबू की कौन सी मूलवृंत (Rootstock) प्रतिरोधी है?
A) खट्टा नींबू | B) ट्राइफोलिएट ऑरेंज (Trifoliate Orange) | C) कागजी नींबू | D) कोई नहीं -
झुलसा रोग के कवक का बीजाणुधानी (Acervulus) कहाँ बनता है?
A) पत्ती के अन्दर | B) पत्ती की सतह पर काले बिन्दुओं के रूप में | C) जड़ में | D) हवा में -
गुच्छा-मुच्छा रोग के पुष्पीय भाग में कलिकाएं किसमें बदल जाती हैं?
A) फल में | B) मांसल हरी कलिकाओं के झुंड में | C) काले चूर्ण में | D) कोई नहीं -
गैमोसिस रोग के नियंत्रण हेतु तने की संक्रमित छाल को हटाकर क्या लगाना चाहिए?
A) यूरिया | B) बोरडॉक्स पेस्ट | C) नमक | D) पानी -
आम के झुलसा रोग के कारण नई कोमल टहनियाँ ऊपर से नीचे की ओर सूखती हैं, इसे क्या कहते हैं?
A) डाई-बैक (Die-back) | B) लीफ ब्लाइट | C) मोजेक | D) कोई नहीं -
गुच्छा-मुच्छा रोग के लिए जिम्मेदार माइट (Mite) का वैज्ञानिक नाम है:
A) एरीयोफिस मैन्जीफेरी (Eriophyes mangiferae) | B) सफेद मक्खी | C) एफिड | D) कोई नहीं -
गैमोसिस रोग की रोकथाम हेतु पौधों के बीच की दूरी कैसी होनी चाहिए?
A) बहुत कम | B) उपयुक्त एवं हवादार (Proper spacing) | C) पास-पास | D) कोई नहीं -
आम के झुलसा रोग के बीजाणु (Conidia) कैसे होते हैं?
A) बहुकोशिकीय | B) एक कोशिकीय और रंगहीन | C) काले | D) काँटेदार -
गुच्छा-मुच्छा रोग के पुष्पक्रम में परागकण (Pollen) और रस (Nectar) की स्थिति क्या होती है?
A) अधिक होते हैं | B) अनुपस्थित या बहुत कम (जिससे कीट नहीं आते) | C) सामान्य | D) मीठे होते हैं -
नींबू के 'गैमोसिस' रोग को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
A) फुट रोट (Foot Rot) | B) लीफ कर्ल | C) कैंकर | D) मोजेक -
आम के झुलसा (Anthracnose) रोग का कवक किस प्रकार का परजीवी है?
A) पूर्ण परजीवी | B) मृताजीवी एवं विकल्पी परजीवी | C) हवा में रहने वाला | D) कोई नहीं -
आम के गुच्छा-मुच्छा रोग में 'हार्मोनल असंतुलन' का मुख्य कारण क्या माना जाता है?
A) इथाइलीन की कमी | B) मैन्जिफेरिन और मैन्जिफेरोलिक अम्ल की अधिकता | C) ऑक्सिन की कमी | D) कोई नहीं -
गैमोसिस रोग के कवक 'फाइटोफ्थोरा' के जूस्पोर्स (Zoospores) कैसे गति करते हैं?
A) हवा द्वारा | B) पानी में तैरकर (Flagella द्वारा) | C) मिट्टी द्वारा | D) कीट द्वारा -
झुलसा रोग से प्रभावित आम के फलों पर किस आकार के धब्बे बनते हैं?
A) गोल | B) आँसू की बूंद के समान (Tear stain) | C) लम्बे | D) कोई नहीं
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