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7. रबी की फसलों के रोग (Disease of Rabi Crops)

इस पेज पर आपको 7. रबी की फसलों के रोग (Disease of Rabi Crops) के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), परीक्षा उपयोगी नोट्स और ऑनलाइन क्विज़ मिलेंगे। अपने ज्ञान का परीक्षण करने और बोर्ड/प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मॉक टेस्ट में अवश्य भाग लें।

अध्याय 7 रबी की फसलों के रोग के MCQ व online test हिंदी में हल करें। RBSE बोर्ड के VVI questions से अभ्यास करें। 3-Level चैलेंज: अगले स्तर को अनलॉक करने के लिए 70% स्कोर करें!

👉 अध्याय का सारांश (Summary)

प्रिय विद्यार्थियों, कृषि जीव विज्ञान के इस अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय 'रबी की फसलों के रोग' (Disease of Rabi Crops) में आपका हार्दिक स्वागत है। खरीफ की फसलों के बाद, सर्दियां शुरू होते ही हमारे किसान भाई खेतों में रबी की फसलें बोते हैं। इनमें मुख्य रूप से गेहूँ, जौ, चना और सरसों जैसी महत्वपूर्ण फसलें शामिल हैं। हालांकि सर्दियों में तापमान कम होता है, लेकिन फिर भी कई प्रकार के हानिकारक कवक (Fungi) और जीवाणु (Bacteria) इन फसलों को अपना शिकार बना लेते हैं। इस अध्याय में हम रबी की मुख्य फसलों में लगने वाले भयंकर रोगों के बारे में बहुत ही विस्तार से और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन करेंगे। आइए इसे अपने दैनिक जीवन और खेतों के कुछ व्यावहारिक उदाहरणों से समझने का प्रयास करते हैं। जब आप सर्दियों के मौसम में किसी गेहूँ के खेत के पास से गुजरते हैं, तो कभी-कभी आपको गेहूँ के तने और पत्तियों पर काले या भूरे रंग का पाउडर जैसा पदार्थ दिखाई देता है। किसान इसे देखकर काफी चिंतित हो जाते हैं। वास्तव में, यह गेहूँ का बहुत ही खतरनाक 'काला या स्तम्भ रोली रोग' (Black or stem rust disease) है, जो एक विशेष कवक के कारण होता है। इसी तरह, आपने सरसों के खेतों में देखा होगा कि सरसों की हरी पत्तियों और तनों पर सफेद रंग के फफोले या पाउडर जैसी संरचनाएं बन जाती हैं। इसे हम 'सफेद रोली रोग' (White rust disease) कहते हैं। ये बीमारियां पौधे के प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित करती हैं, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आती है और किसान को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस विस्तृत अध्याय में हम गेहूँ के अनावृत कण्ड रोग (Loose smut), सेहू रोग (Ear cockle), जौ का आवृत कण्ड रोग (Covered smut), बैंगन का लघु पर्ण रोग (Little leaf disease), और जीरे का म्लानि एवं छाछ्या रोग (Wilt and Powdery mildew) जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण रोगों के बारे में गहराई से पढ़ेंगे। हम जानेंगे कि इन सभी रोगों के मुख्य रोगकारक क्या हैं, खेतों में इन बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को देखकर हम इनकी पहचान कैसे कर सकते हैं, और इनका प्रभावी वैज्ञानिक प्रबंधन (Management) कैसे किया जा सकता है। रोग प्रबंधन के अंतर्गत बीजोपचार, फसल चक्र, और उचित रसायनों का छिड़काव जैसी तकनीकी जानकारी बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। NCERT और RBSE बोर्ड परीक्षा 2027 की दृष्टि से यह संपूर्ण अध्याय आपके पाठ्यक्रम का एक बहुत ही स्कोरिंग हिस्सा है। हर साल बोर्ड परीक्षाओं में इन रोगों के वैज्ञानिक नाम, उनके फैलने के कारण और उनके नियंत्रण के उपायों से संबंधित बहुत सारे महत्वपूर्ण Objective questions in hindi निश्चित रूप से पूछे जाते हैं। आपको फफूंद जनित रोगों और जीवाणु जनित रोगों के बीच का अंतर बहुत ही स्पष्ट रूप से याद होना चाहिए। आपकी इसी बेहतरीन तैयारी के लिए, हमने इस एजुकेशनल पोर्टल पर इन सभी महत्वपूर्ण और जटिल टॉपिक्स को कवर करते हुए एक शानदार ऑनलाइन टेस्ट तैयार किया है। इन बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) का नियमित रूप से अभ्यास करने से आपकी विषय पर पकड़ बहुत ही मजबूत होगी। यह ऑनलाइन क्विज़ न केवल आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा, बल्कि आपको यह भी सिखाएगा कि परीक्षा कक्ष में समय का सही प्रबंधन कैसे करना है। तो आइए, रबी की फसलों को बीमारियों से बचाने के इन वैज्ञानिक तरीकों को गहराई से समझें। विशेषता: यह एक 3-Level आधारित यूनीक क्विज़ है। अगले स्तर (Level 2 और 3) को अनलॉक करने के लिए छात्रों को वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक स्कोर करने होंगे, जो उनकी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को 100% मजबूत बनाता है।

महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions)

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विद्यार्थी पंजीकरण

क्विज़ के महत्वपूर्ण निर्देश:

  • सारे concept clear करने के बाद ही टेस्ट दें।
  • इस ऑनलाइन टेस्ट में सभी प्रश्न बहुविकल्पीय (MCQ) हैं।
  • प्रत्येक प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़ें और सही विकल्प का चयन करें।
  • क्विज़ लिंक दोस्तों तक शेयर करें।
  • विशेष नियम: यह क्विज़ 3 स्तरों में है। अगला स्तर (Level) खोलने के लिए आपको वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक लाने होंगे।
  • पूरा चैप्टर अच्छी तरह से याद करने के बाद ही क्विज में भाग ले
  • अपनी डिटेल सही भरें, क्विज़ सब्मिट करने के बाद feedback जरूर दे। अच्छे फीडबैक साइट के होम पेज पर प्रकाशित होंगे
  • सवालो को आराम से हल करें, जल्दीबाजी नहीं करें
  • टेस्ट सबमिट करने के बाद आपका स्कोर आपके शिक्षक के डैशबोर्ड पर प्रदर्शित होगा।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षा की बेहतरीन तैयारी के लिए आप इस टेस्ट का बार-बार अभ्यास कर सकते हैं।
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प्रश्न 1 / 20
अध्याय के सभी प्रश्न (Revision Notes)

*नोट: यह सेक्शन रिवीजन के लिए है। अपना ज्ञान परखने के लिए ऊपर दिए गए क्विज़ में भाग लें।

  1. गेहूँ के 'काला या स्तम्भ रोली' रोग का कारक कवक कौन सा है?
    A) पक्सीनिया ग्रामिनिस ट्रीटीसाई  |  B) पक्सीनिया रीकोंडिटा  |  C) पक्सीनिया स्ट्रिफॉर्मिस  |  D) अल्टरनेरिया
  2. गेहूँ के सेहू (Ear Cockle) रोग का मुख्य लक्षण क्या है?
    A) पत्तियों का गिरना  |  B) दानों के स्थान पर कड़े भूरे रंग की पित्तिकाएँ (Galls) बनना  |  C) जड़ों का सड़ना  |  D) तना नीला होना
  3. सरसों के 'सफेद रोली' (White Rust) रोग का कारक कवक है:
    A) एल्ब्युगो कैंडिडा (Albugo candida)  |  B) अल्टरनेरिया  |  C) पक्सीनिया  |  D) फ्यूसेरियम
  4. जौ का 'आवृत्त कण्डुवा' (Covered Smut) किस प्रकार का रोग है?
    A) अंतः बीजोढ़  |  B) बाह्य बीजोढ़ (Externally Seed-borne)  |  C) वातोढ़  |  D) मृदोढ़
  5. रोली (Rust) रोगों में कवक द्वारा बनने वाले भूरे/काले फफोलों को क्या कहते हैं?
    A) स्फुट  |  B) स्फोट या फफोले (Pustules)  |  C) कण  |  D) गाँठ
  6. गेहूँ का 'मौल्या रोग' किसके द्वारा होता है?
    A) कवक  |  B) जीवाणु  |  C) सूत्रकृमि (Nematode - Heterodera avenae)  |  D) विषाणु
  7. सरसों के सफेद रोली रोग में पत्तियों की किस सतह पर सफेद स्फोट बनते हैं?
    A) ऊपरी सतह  |  B) निचली सतह (Lower surface)  |  C) तने पर  |  D) जड़ पर
  8. जीवाणु जनित 'तेन्दू' (Tundu) रोग किस फसल से संबंधित है?
    A) सरसों  |  B) गेहूँ (Wheat)  |  C) जौ  |  D) चना
  9. पीली रोली (Yellow Rust) रोग के स्फोट किस आकार में व्यवस्थित होते हैं?
    A) अनियमित  |  B) पत्तियों की शिराओं के समानांतर कतारों में  |  C) गोल  |  D) त्रिकोणीय
  10. गेहूँ के सेहू रोग के नियंत्रण हेतु बीजों को कितने प्रतिशत नमक के घोल में डालना चाहिए?
    A) 2%  |  B) 20% नमक का घोल  |  C) 50%  |  D) 1%
  11. रोली रोग के प्रबंधन हेतु कौन सा कवकनाशी प्रभावी है?
    A) यूरिया  |  B) मैन्कोजेब या प्रोपीकोनाजोल  |  C) जिप्सम  |  D) नमक
  12. जौ के आवृत्त कण्डुवा में दानों के स्थान पर भरा काला चूर्ण किससे ढका होता है?
    A) मिट्टी से  |  B) एक पतली सिल्वर रंग की झिल्ली से  |  C) छिलके से  |  D) कोई नहीं
  13. जीवाणु जनित तेन्दू रोग का कारक जीवाणु है:
    A) क्लेविबैक्टर ट्रीटीसाई  |  B) जैन्थोमोनास  |  C) राइजोबियम  |  D) कोई नहीं
  14. सरसों के पुष्पक्रम का विकृत होकर 'हिरण के सींग' जैसा हो जाना किस रोग का लक्षण है?
    A) अल्टरनेरिया झुलसा  |  B) सफेद रोली (White Rust)  |  C) मृदु रोमिल  |  D) कण्डुवा
  15. गेहूँ की रोली प्रतिरोधी किस्म का उदाहरण है:
    A) सोनालिका  |  B) कल्याण सोना  |  C) A और B दोनों  |  D) कोई नहीं
  16. पक्सीनिया ग्रामिनिस ट्रीटीसाई कवक अपना जीवन चक्र किन दो पौधों पर पूरा करता है?
    A) गेहूँ और सरसों  |  B) गेहूँ और बारबेरी (Barberry)  |  C) गेहूँ और मक्का  |  D) केवल गेहूँ
  17. सेहू रोग का संचरण किसके द्वारा होता है?
    A) हवा  |  B) संक्रमित बीज (पित्तिकाओं के साथ मिश्रित)  |  C) मिट्टी  |  D) कीट
  18. जौ के आवृत्त कण्डुवा के बीजाणु (Chlamydospores) बीज के किस भाग पर चिपके रहते हैं?
    A) अन्दर भ्रूण में  |  B) बाहरी आवरण पर  |  C) जड़ में  |  D) कोई नहीं
  19. अल्टरनेरिया झुलसा (Alternaria Blight) रोग में पत्तियों पर किस प्रकार के धब्बे बनते हैं?
    A) सफेद  |  B) संकेन्द्री घेरे वाले (Target board appearance)  |  C) काली धारियां  |  D) कोई नहीं
  20. काला रोली रोग के काले फफोले वास्तव में क्या होते हैं?
    A) यूरिडिनिया  |  B) टीलियम (Telia)  |  C) पिक्नीडिया  |  D) कोई नहीं
  21. सेहू और तेन्दू रोगों का एक साथ होना क्या कहलाता है?
    A) जटिल रोग  |  B) सेहू-तेन्दू सम्मिश्र (Complex)  |  C) मिश्रित संक्रमण  |  D) कोई नहीं
  22. सरसों के सफेद रोली रोग के बीजाणु मिट्टी में कितने समय तक जीवित रह सकते हैं?
    A) 1 महीना  |  B) 2-3 वर्ष (ओस्पोर्स के रूप में)  |  C) 10 वर्ष  |  D) शून्य
  23. भूरी रोली (Brown Rust) को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
    A) स्तम्भ रोली  |  B) पर्ण रोली (Leaf Rust)  |  C) धारीदार रोली  |  D) कोई नहीं
  24. जौ के बीज उपचार हेतु प्रयुक्त कवकनाशी 'थीरम' की मात्रा है:
    A) 1 ग्राम  |  B) 2.5 ग्राम/किग्रा बीज  |  C) 10 ग्राम  |  D) 50 ग्राम
  25. सेहू रोग की पित्तिकाएं (Galls) पानी में तैरती हैं क्योंकि वे:
    A) भारी होती हैं  |  B) दानों से हल्की होती हैं  |  C) जीवित होती हैं  |  D) कोई नहीं
  26. सरसों की फसल में 'अगेती बुवाई' किस रोग से बचने में सहायक है?
    A) सफेद रोली  |  B) अल्टरनेरिया झुलसा  |  C) A और B दोनों  |  D) कोई नहीं
  27. काली रोली रोग की उग्र अवस्था में दाने कैसे हो जाते हैं?
    A) बड़े  |  B) झुर्रीदार और हल्के  |  C) काले चूर्ण जैसे  |  D) मीठे
  28. सेहू रोग की पित्तिकाओं को हाथ से या छलनी से अलग करना कौन सी विधि है?
    A) यांत्रिक  |  B) रासायनिक  |  C) जैविक  |  D) प्राकृतिक
  29. पुष्पक्रम का 'अतिवृद्धि' (Hypertrophy) होना किस रोग की प्रमुख विशेषता है?
    A) सफेद रोली  |  B) काला रोली  |  C) सेहू  |  D) कोई नहीं
  30. जौ का 'अनावृत्त कण्डुवा' (Loose Smut) किस प्रकार का रोग है?
    A) बाह्य बीजोढ़  |  B) अंतः बीजोढ़ (Internally Seed-borne)  |  C) मृदोढ़  |  D) कोई नहीं
  31. काला रोली कवक के 'यूरीडिनियो बीजाणु' किस प्रकार के होते हैं?
    A) एक कोशिकीय, भूरे और अंडाकार  |  B) द्वि-कोशिकीय  |  C) अचल  |  D) सफेद
  32. पक्सीनिया कवक के जीवन चक्र में कुल कितनी बीजाणु अवस्थाएं पाई जाती हैं?
    A) 2  |  B) 5 (यूरीडो, टीलियो, बेसिडियो, पिक्नियो, एसियो)  |  C) 3  |  D) 4
  33. सेहू रोग का सूत्रकृमि (Anguina tritici) अनुकूल परिस्थिति में पित्तिका से बाहर निकलकर कहाँ पहुँचता है?
    A) जड़ में  |  B) पौधे के बढ़ते हुए प्ररोह शीर्ष (Growing point) पर  |  C) मिट्टी में गहराई पर  |  D) फूल में
  34. सरसों के सफेद रोली रोग का प्राथमिक संक्रमण स्रोत क्या है?
    A) हवा  |  B) मृदा में उपस्थित ओस्पोर्स (Oospores)  |  C) शुद्ध जल  |  D) कीट
  35. काला रोली के 'टीलियो बीजाणु' (Teliospores) की संरचना कैसी होती है?
    A) एक कोशिकीय  |  B) दो कोशिकीय और गहरे भूरे रंग के  |  C) तीन कोशिकीय  |  D) सफेद
  36. जौ के आवृत्त कण्डुवा के प्रबंधन हेतु 'सौर ताप उपचार' किसने दिया था?
    A) बटलर  |  B) लूथरा एवं सत्तर (1934)  |  C) डी बेरी  |  D) मुन्कर
  37. किस रोली को 'नारंगी रोली' (Orange Rust) भी कहा जाता है?
    A) काली रोली  |  B) भूरी रोली (Brown Rust)  |  C) पीली रोली  |  D) कोई नहीं
  38. सेहू रोग की पित्तिकाओं को अलग करने हेतु नमक के घोल का घनत्व कितना होना चाहिए?
    A) 1.0  |  B) 1.10 - 1.20  |  C) 2.0  |  D) 0.5
  39. सरसों के सफेद रोली रोग का द्वितीयक संक्रमण किसके द्वारा होता है?
    A) ओस्पोर्स  |  B) स्पोरेंजिया और जूस्पोर्स (हवा द्वारा)  |  C) मिट्टी  |  D) जड़
  40. रोली रोग के कवक 'पक्सीनिया' का वर्गीकरण (Order) क्या है?
    A) यूरीडिनेल्स (Uredinales)  |  B) पेरोनोस्पोरेल्स  |  C) अल्टरनेरिएल्स  |  D) कोई नहीं
  41. सेहू रोग के लक्षण सबसे पहले किस अवस्था में स्पष्ट दिखाई देते हैं?
    A) अंकुरण  |  B) बालियां निकलने पर  |  C) बुवाई पर  |  D) कटाई पर
  42. जौ के दाने कण्डुवा चूर्ण में बदल जाने पर झिल्ली कब फटती है?
    A) बालियां निकलते समय  |  B) मड़ाई (Threshing) के समय  |  C) हमेशा फटी रहती है  |  D) कभी नहीं
  43. सरसों के फूल का 'सत्य प्रजनन अंगों' का नष्ट होना किस रोग का परिणाम है?
    A) सफेद रोली  |  B) झुलसा  |  C) कण्डुवा  |  D) कोई नहीं
  44. अल्टरनेरिया झुलसा के नियंत्रण हेतु 'बीज उपचार' के लिए गर्म पानी का तापमान क्या होना चाहिए?
    A) 30°C  |  B) 50°C (20 मिनट हेतु)  |  C) 100°C  |  D) 80°C
  45. गेहूँ में पीली रोली मुख्य रूप से किन राज्यों में अधिक देखी जाती है?
    A) दक्षिण भारत  |  B) उत्तर-पश्चिम भारत (ठंडे क्षेत्र)  |  C) मध्य भारत  |  D) केवल राजस्थान
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