6. खरीफ की फसलों के रोग (Disease of Kharif Crops)
इस पेज पर आपको 6. खरीफ की फसलों के रोग (Disease of Kharif Crops) के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), परीक्षा उपयोगी नोट्स और ऑनलाइन क्विज़ मिलेंगे। अपने ज्ञान का परीक्षण करने और बोर्ड/प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मॉक टेस्ट में अवश्य भाग लें।
👉 अध्याय का सारांश (Summary)
प्रिय विद्यार्थियों, कृषि जीव विज्ञान के इस अत्यंत व्यावहारिक और महत्वपूर्ण अध्याय 'खरीफ की फसलों के रोग' (Disease of Kharif Crops) में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। जैसा कि हम सभी इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि हमारे देश भारत में कृषि मुख्य रूप से मौसम और विशेषकर मानसून की वर्षा पर निर्भर करती है। खरीफ की फसलें वे प्रमुख फसलें होती हैं जिन्हें हम मुख्य रूप से बारिश के मौसम की शुरुआत में, यानी जून और जुलाई के महीने में खेतों में बोते हैं। चूँकि इस पूरे मानसूनी मौसम में वातावरण में बहुत अधिक नमी, उमस और तापमान का उतार-चढ़ाव लगातार बना रहता है, इसलिए यह समय फफूंद (कवक), जीवाणु और विषाणुओं के तेजी से पनपने और फैलने के लिए सबसे अधिक अनुकूल माना जाता है। यही मुख्य कारण है कि रबी की तुलना में खरीफ की फसलों में बीमारियों का खतरा हमेशा सबसे ज्यादा रहता है और अक्सर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
आइए इसे अपने आस-पास के एक साधारण और व्यावहारिक उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं। यदि आपने कभी अपने गाँव में बाजरे या कपास के खेत को ध्यान से देखा हो, तो बारिश के दिनों में कभी-कभी बाजरे की बालियों में स्वस्थ दानों की जगह हरी-हरी पत्तियों जैसी अजीब संरचनाएं निकल आती हैं। एक आम किसान इसे देखकर बहुत ज्यादा परेशान हो जाता है। वास्तव में यह कोई जादू नहीं बल्कि बाजरे का बहुत ही खतरनाक 'हरित बाली रोग' या मृदुरोमिलआसिता (Downy mildew/Green ear disease) है जो एक विशेष प्रकार के कवक के कारण बड़ी तेजी से फैलता है। इसी तरह मूंगफली के पत्तों पर गोल-गोल गहरे काले और भूरे रंग के धब्बे बन जाना, जिसे हम 'टिक्का रोग' के नाम से जानते हैं, या फिर भिंडी की हरी-भरी पत्तियों का अचानक से पीला पड़ जाना (Yellow vein mosaic virus), ये सभी खरीफ की फसलों में लगने वाले कुछ बेहद विनाशकारी और आम रोगों के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। इस संपूर्ण अध्याय में हम इन्हीं प्रमुख खरीफ फसलों—जैसे कि बाजरा, कपास, मूंगफली, भिंडी और टमाटर—में लगने वाले विभिन्न रोगों के बारे में बहुत ही विस्तार से और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन करेंगे।
हम जानेंगे कि इन भयानक बीमारियों के पीछे असली कारण (Causal organism) क्या है, खेतों में हम इन बीमारियों के शुरुआती लक्षणों (Symptoms) को देखकर इनकी सही और त्वरित पहचान कैसे कर सकते हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात, एक जागरूक कृषि विशेषज्ञ के रूप में हम इन रोगों का प्रभावी रूप से प्रबंधन या रोकथाम (Disease Management) कैसे कर सकते हैं। रोग प्रबंधन में बीजोपचार, उचित फसल चक्र अपनाना, रोग प्रतिरोधी किस्मों की बुवाई करना और सही समय पर उचित रसायनों का छिड़काव करना जैसी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक विधियाँ शामिल हैं। NCERT और RBSE बोर्ड परीक्षा 2027 के लिहाज से यह अध्याय आपके कृषि विज्ञान पाठ्यक्रम की जान है। हर साल फाइनल बोर्ड परीक्षाओं में इन प्रमुख रोगों के वैज्ञानिक नाम, उनके रोगकारकों के प्रकार, फैलने के तरीके और उनसे बचाव के ठोस उपायों से जुड़े ढेरों Objective questions in hindi अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। आपको यह बहुत अच्छे से याद रखना होगा कि कौन सा रोग फफूंद से होता है और कौन सा रोग जीवाणु या विषाणु से फैलता है, क्योंकि ऐसे ही बारीक अंतर वाले घुमावदार सवाल परीक्षा में छात्रों को अक्सर कंफ्यूज कर देते हैं।
आपकी इसी दुविधा को हमेशा के लिए दूर करने और तैयारी को एकदम पुख्ता बनाने के लिए, हमने इस एजुकेशनल पोर्टल पर एक बहुत ही शानदार और चुनौतीपूर्ण ऑनलाइन क्विज़ तैयार किया है। इस ऑनलाइन टेस्ट में दिए गए सभी बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) पूरी तरह से बोर्ड परीक्षा के नवीनतम पैटर्न और ब्लूप्रिंट पर आधारित हैं। जब आप नियमित रूप से इन VVI प्रश्नों का लगन से अभ्यास करेंगे, तो आपके दिमाग में सभी महत्वपूर्ण रोगों के नाम और उनके लक्षण स्थायी रूप से छप जाएंगे। यह बेहतरीन अभ्यास आपको न केवल बोर्ड परीक्षा में 100% अंक दिलाने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में यदि आप कृषि पर्यवेक्षक (Agriculture Supervisor) या किसी अन्य कृषि क्षेत्र में अपना सुनहरा करियर बनाना चाहेंगे, तो वहां भी यह जमीनी ज्ञान आपके बहुत काम आएगा। तो आइए, पूरे उत्साह और एकाग्रता के साथ इस अध्याय के प्रश्नों का अभ्यास करें और अपनी सफलता का परचम लहराएं।
विशेषता: यह एक 3-Level आधारित यूनीक क्विज़ है। अगले स्तर (Level 2 और 3) को अनलॉक करने के लिए छात्रों को वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक स्कोर करने होंगे, जो उनकी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को 100% मजबूत बनाता है。
अध्याय के सभी प्रश्न (Revision Notes)
*नोट: यह सेक्शन रिवीजन के लिए है। अपना ज्ञान परखने के लिए ऊपर दिए गए क्विज़ में भाग लें।
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बाजरे का 'मृदु रोमिल आसिता' रोग किस कवक से होता है?
A) स्क्लेरोस्पोरा ग्रामिनिकोला | B) क्लेविसेप्स | C) अल्टरनेरिया | D) कोई नहीं -
बाजरे के अर्गट (Ergot) रोग में निकलने वाला चिपचिपा पदार्थ:
A) दूध | B) शहद जैसा रस (Honey dew) | C) गोंद | D) पानी -
मूँगफली का 'टिक्का' रोग किससे संबंधित है?
A) जीवाणु | B) कवक (Fungi) | C) विषाणु | D) सूक्ष्म जीव -
कपास का 'कोणीय पत्ती धब्बा' रोग किसके कारण होता है?
A) कवक | B) जीवाणु (Xanthomonas) | C) विषाणु | D) कीट -
नींबू का 'कैंकर' रोग किसे प्रभावित करता है?
A) पत्ती | B) फल | C) तना | D) उपरोक्त सभी -
टमाटर का 'पर्ण कुंचन' (Leaf Curl) किसके द्वारा फैलता है?
A) सफेद मक्खी (White fly) | B) हवा | C) पानी | D) मिट्टी -
मूँगफली के 'विषाणु गुच्छा' रोग का लक्षण क्या है?
A) बौनापन और पत्तियों का गुच्छा | B) सूखना | C) पीलापन | D) कोई नहीं -
भिण्डी के 'पीत शिरा मोजेक' का वाहक कौन है?
A) जूं | B) सफेद मक्खी (Bemisia tabaci) | C) मिट्टी | D) हवा -
बाजरे का 'हरित बाली' रोग किस रोग का दूसरा नाम है?
A) अर्गट | B) मृदु रोमिल आसिता | C) कण्डुवा | D) झुलसा -
मूँगफली का टिक्का रोग रोकने हेतु प्रभावी कवकनाशी:
A) यूरिया | B) कार्बेन्डाजिम या मैन्कोजेब | C) नमक | D) कोई नहीं -
नींबू कैंकर के धब्बे दिखने में कैसे होते हैं?
A) चिकने | B) कर्कश और उभरे हुए | C) कोमल | D) नीले -
टमाटर अगेती झुलसा का कारक कवक है:
A) अल्टरनेरिया सोलेनाई | B) सर्कोस्पोरा | C) क्लेविसेप्स | D) कोई नहीं -
कपास के जीवाणु अंगमारी रोग का नियंत्रण:
A) यूरिया | B) स्ट्रेप्टोसाइक्लिन | C) जिप्सम | D) नमक -
बुवाई से पहले बाजरे के बीजों को उपचारित करते हैं:
A) 2% नमक घोल | B) 20% नमक घोल | C) 50% घोल | D) 1% -
अर्गोटिज्म विषैला प्रभाव किसके खाने से होता है?
A) ताजा बाजरा | B) अर्गट प्रभावित बाजरा | C) मक्का | D) गेंहूँ -
बाजरे के अर्गट रोग में बनी काली कठोर संरचनाएं:
A) कोनिडिया | B) स्क्लेरोशिया (Sclerotia) | C) बीजाणु | D) कवक जाल -
मूँगफली का अगेती पत्ती धब्बा कवक है:
A) सर्कोस्पोरा एरिचिडीकोला | B) सर्कोस्पोरा पर्सोनेटा | C) अल्टरनेरिया | D) कोई नहीं -
कपास के 'ब्लैक आर्म' अवस्था में क्या होता है?
A) पत्तियां काली होना | B) शाखाओं पर काले लम्बे धब्बे और टूटना | C) जड़ गलना | D) कोई नहीं -
ट्राइकोडर्मा कल्चर की बीजोपचार मात्रा:
A) 1 ग्राम | B) 6-10 ग्राम/किग्रा बीज | C) 100 ग्राम | D) 50 ग्राम -
टमाटर की 'अर्का रक्षक' किस्म है:
A) एकल रोगरोधी | B) बहु-रोगरोधी (Multi-resistant) | C) केवल संकर | D) कोई नहीं -
नींबू के कैंकर रोग के प्रसार में सहायक कीट है:
A) सफेद मक्खी | B) पर्ण सुरंगक (Leaf Miner) | C) टिड्डी | D) मधुमक्खी -
मूँगफली का पछेती पत्ती धब्बा कवक है:
A) सर्कोस्पोरा पर्सोनेटा | B) एरिचिडीकोला | C) क्लेविसेप्स | D) कोई नहीं -
बाजरे के हरित बाली रोग में फूल किसमें बदल जाते हैं?
A) दाने में | B) हरी पत्ती जैसी संरचनाओं में | C) काले चूर्ण में | D) कोई नहीं -
कपास की कोणीय पत्ती धब्बा अवस्था को क्या कहते हैं?
A) ब्लैक आर्म | B) सिरा अंगमारी (Vein blight) | C) बोल रोट | D) उपरोक्त सभी -
टमाटर पर्ण कुंचन रोग का कारण क्या है?
A) कवक | B) विषाणु (Virus) | C) जीवाणु | D) पोषक तत्व -
बाजरे का कौन सा रोग 'शहद जैसा रस' निकलने से पहचाना जाता है?
A) मृदु रोमिल | B) अर्गट | C) कण्डुवा | D) झुलसा -
मूँगफली का टिक्का रोग कब अधिक फैलता है?
A) गर्म और नम मौसम | B) अत्यधिक ठण्ड | C) तेज धूप | D) कोई नहीं -
सफेद मक्खी नियंत्रण हेतु टमाटर में प्रयुक्त कीटनाशी:
A) इमिडाक्लोप्रिड | B) यूरिया | C) नमक | D) कोई नहीं -
भिण्डी का पीत शिरा मोजेक कैसा रोग है?
A) जीवाणु जनित | B) विषाणु जनित (Viral) | C) कवक जनित | D) कोई नहीं -
नींबू कैंकर रोग का जीवाणु है:
A) जैन्थोमोनास एक्सोनोपोडिस | B) क्लेविसेप्स | C) अल्टरनेरिया | D) कोई नहीं -
मूँगफली के अगेती और पछेती धब्बों में मुख्य अंतर है:
A) रंग और किनारे | B) आकार | C) पौधे की उम्र | D) उपरोक्त सभी -
अर्गट रोग के स्क्लेरोशिया में पाया जाने वाला विषैला तत्व:
A) निकोटीन | B) अर्गोटीन या अर्गोमेट्रिन | C) कैफीन | D) कोई नहीं -
टमाटर का जीवाणु ग्लानी (Bacterial Wilt) का लक्षण है:
A) पत्तियां पीली पड़ना | B) जायलम वाहिकाओं का अवरुद्ध होना और अचानक मुरझाना | C) गाँठ बनना | D) कोई नहीं -
मृदु रोमिल आसिता (Downy Mildew) के बीजाणु पत्ती की किस सतह पर दिखते हैं?
A) ऊपरी | B) निचली सतह पर सफेद रुई जैसा कवक | C) तने पर | D) जड़ पर -
कपास के जीवाणु अंगमारी में 'बोल रोट' का अर्थ है:
A) पत्ती सड़ना | B) कपास के डोडों का सड़ना | C) जड़ सड़ना | D) तना टूटना -
नींबू कैंकर रोग के प्रबंधन हेतु 'स्ट्रेप्टोसाइक्लिन' की मात्रा:
A) 100 ppm | B) 500-1000 ppm | C) 10 ppm | D) 50 ppm -
टमाटर के मोजेक रोग का संचरण किसके द्वारा होता है?
A) बीज | B) कृषि औजारों एवं स्पर्श द्वारा | C) हवा | D) मिट्टी -
बाजरे के रोग प्रबंधन हेतु 'ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई' क्यों आवश्यक है?
A) पानी बचाने हेतु | B) मिट्टी में मौजूद स्क्लेरोशिया एवं ओस्पोर्स को नष्ट करने हेतु | C) मिट्टी नरम करने हेतु | D) कोई नहीं -
मूँगफली के विषाणु गुच्छा (Rosette) का वाहक कीट है:
A) सफेद मक्खी | B) एफिड (Maize aphid) | C) टिड्डी | D) कोई नहीं -
नींबू कैंकर रोग के लिए सबसे संवेदनशील नींबू प्रजाति है:
A) कागजी नींबू | B) खट्टा नींबू | C) मीठा नींबू | D) कोई नहीं -
टमाटर अगेती झुलसा में 'संकेन्द्री घेरे' कहाँ बनते हैं?
A) पत्तियों पर लक्ष्य बोर्ड (Target board) जैसे धब्बे | B) जड़ पर | C) फूल पर | D) कोई नहीं -
कपास के जीवाणु अंगमारी का प्राथमिक संक्रमण स्रोत क्या है?
A) हवा | B) संक्रमित बीज एवं फसल अवशेष | C) शुद्ध जल | D) मिट्टी -
बाजरे का कण्डुवा (Smut) रोग किसके द्वारा होता है?
A) टोलिपोस्पोरियम पेनिसिलरी | B) क्लेविसेप्स | C) अल्टरनेरिया | D) कोई नहीं -
मूँगफली में टिक्का रोग के धब्बे के चारों ओर पीला घेरा (Halo) किसमें होता है?
A) अगेती धब्बा (Early leaf spot) | B) पछेती धब्बा | C) दोनों | D) किसी में नहीं -
विषाणु जनित रोगों के नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका है:
A) दवा छिड़कना | B) रोग मुक्त बीज एवं वाहक कीटों का नियंत्रण | C) खाद डालना | D) पानी देना
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