3. अतीत में दबे पाँव (Ateet Mein Dabe Paon)
इस पेज पर आपको 3. अतीत में दबे पाँव (Ateet Mein Dabe Paon) के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), परीक्षा उपयोगी नोट्स और ऑनलाइन क्विज़ मिलेंगे। अपने ज्ञान का परीक्षण करने और बोर्ड/प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मॉक टेस्ट में अवश्य भाग लें।
👉 अध्याय का सारांश (Summary)
प्रिय विद्यार्थियों, कक्षा 12 हिंदी की पूरक पाठ्यपुस्तक 'वितान भाग 2' के इस अध्याय में हम ओम थानवी जी द्वारा रचित 'अतीत में दबे पाँव' का अध्ययन करेंगे। यह पाठ यात्रा वृत्तांत और रिपोर्टाज का एक अद्भुत संगम है, जिसमें लेखक ने सिंधु घाटी सभ्यता के दो प्रमुख नगरों— मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की भव्यता और उनकी सुनियोजित व्यवस्था का सजीव वर्णन किया है। यह अध्याय आपकी बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल प्राचीन इतिहास को समझने में मदद करता है, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि हज़ारों साल पहले का मनुष्य तकनीकी रूप से कितना उन्नत और नागरिक सुविधाओं के प्रति कितना जागरूक था।
मोहनजोदड़ो जिसे 'मुर्दों का टीला' भी कहा जाता है, अपनी वास्तुकला और नगर नियोजन (Town Planning) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ की सड़कें चौड़ी हैं, घर पक्की ईंटों के बने हैं और जल निकासी (Drainage system) की व्यवस्था इतनी सटीक है कि आज के आधुनिक शहर भी उसके सामने फीके नज़र आते हैं। लेखक जब वहाँ की गलियों में घूमते हैं, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वे किसी जीवित शहर में टहल रहे हों। हज़ारों साल बाद भी उस सभ्यता के अवशेष हमें चकित कर देते हैं कि बिना किसी आधुनिक मशीन के उस समय का इंसान इतना कुछ कैसे बना पाया।
यह पाठ हमें यह सोचने पर विवश करता है कि क्या आज हम अपनी आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों को भूल रहे हैं? मोहनजोदड़ो में हमें 'महाकुंड' (Great Bath) मिलता है, जो शायद धार्मिक अनुष्ठानों या सामूहिक स्नान के लिए इस्तेमाल होता होगा। इसके अलावा, यहाँ की खुदाई में मिली नर्तकी की मूर्ति, मुहरें और खिलौने बताते हैं कि वह सभ्यता केवल तकनीकी रूप से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत समृद्ध थी। यहाँ का समाज शायद तानाशाही के बजाय लोकतंत्रीय व्यवस्था में विश्वास रखता था, क्योंकि यहाँ किसी भव्य राजमहल या विशाल मंदिर के अवशेष नहीं मिलते, बल्कि आम जनता के लिए बनाए गए सुख-सुविधाओं के ढाँचे मिलते हैं।
लेखक का यात्रा वृत्तांत हमें समय के उस अतीत में ले जाता है जहाँ हम यह महसूस करते हैं कि कैसे हज़ारों साल पहले भी मनुष्य ने प्रकृति और तकनीक के बीच सामंजस्य बैठाया था। 'अतीत में दबे पाँव' हमें अपनी सभ्यता पर गर्व करना सिखाती है और यह भी याद दिलाती है कि प्रकृति का सम्मान और सुव्यवस्थित जीवन शैली ही किसी भी समाज की वास्तविक पहचान होती है। यह पाठ हमें प्राचीन भारत की गौरवशाली विरासत से रूबरू कराता है।
विशेषता: यह एक 3-Level आधारित यूनीक क्विज़ है। अगले स्तर (Level 2 और 3) को अनलॉक करने के लिए छात्रों को वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक स्कोर करने होंगे, जो उनकी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को 100% मजबूत बनाता है।
अध्याय के सभी प्रश्न (Revision Notes)
*नोट: यह सेक्शन रिवीजन के लिए है। अपना ज्ञान परखने के लिए ऊपर दिए गए क्विज़ में भाग लें।
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'अतीत में दबे पाँव' पाठ के लेखक कौन हैं?
A) मनोहर श्याम जोशी | B) ओम थानवी | C) फणीश्वरनाथ रेणु | D) जैनेंद्र कुमार -
मोहनजोदड़ो को क्या कहा जाता है?
A) जीवित शहर | B) मुर्दों का टीला | C) राजा का महल | D) देवताओं का नगर -
मोहनजोदड़ो किस सभ्यता का नगर था?
A) वैदिक सभ्यता | B) सिंधु घाटी सभ्यता | C) मौर्य सभ्यता | D) गुप्त सभ्यता -
मोहनजोदड़ो की गलियाँ कैसी थीं?
A) तंग | B) चौड़ी और सीधी | C) टेढ़ी-मेढ़ी | D) कीचड़ भरी -
मोहनजोदड़ो में पानी की निकासी की क्या व्यवस्था थी?
A) कोई नहीं | B) पक्की नालियां | C) खुली नालियां | D) नदी -
मोहनजोदड़ो में मिली सबसे प्रसिद्ध मूर्ति किसकी है?
A) राजा की | B) नर्तकी की | C) देवता की | D) पशु की -
महाकुंड का उपयोग किस लिए होता था?
A) खेती | B) सामूहिक स्नान | C) अनाज रखने | D) खेल -
मोहनजोदड़ो का नगर नियोजन किसके समान था?
A) जंगल | B) आज के आधुनिक शहर | C) पुराने गाँव | D) गुफा -
क्या वहाँ भव्य मंदिरों के अवशेष मिले हैं?
A) हाँ | B) नहीं | C) पता नहीं | D) शायद -
लेखक ने मोहनजोदड़ो के बारे में क्या कहा है?
A) यह एक खंडहर है | B) यह एक जीवित शहर था | C) यह एक खेल का मैदान था | D) यह एक बाजार था -
मोहनजोदड़ो की खुदाई में क्या-क्या मिला?
A) मुहरें, बर्तन और खिलौने | B) सोना | C) गाड़ियाँ | D) कपड़े -
मोहनजोदड़ो के घर किस सामग्री से बने थे?
A) मिट्टी | B) पक्की ईंटों | C) पत्थरों | D) लकड़ी -
हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के बीच की दूरी कितनी है?
A) 100 मील | B) काफी अधिक | C) 5 मील | D) पता नहीं -
लेखक के अनुसार हज़ारों साल पहले का इंसान कैसा था?
A) पिछड़ा | B) तकनीकी रूप से उन्नत | C) जंगली | D) गरीब -
पाठ का मुख्य विषय क्या है?
A) पर्यटन | B) प्राचीन सभ्यता की नगर व्यवस्था | C) राजा का जीवन | D) युद्ध -
मोहनजोदड़ो के नगर नियोजन की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
A) सुव्यवस्थित गलियाँ और जल निकासी | B) महल | C) धार्मिक स्थान | D) बाज़ार -
महाकुंड की जल शोधन व्यवस्था कैसी थी?
A) अशिक्षित | B) अत्यंत उन्नत | C) नष्ट हो चुकी | D) पता नहीं -
क्या मोहनजोदड़ो एक 'लोकतांत्रिक' शहर था?
A) हाँ, क्योंकि बड़े महलों का अभाव है | B) नहीं, राजा का शासन था | C) पता नहीं | D) शायद -
लेखक ने मोहनजोदड़ो की तुलना किन आधुनिक शहरों से की है?
A) चंडीगढ़ | B) दिल्ली | C) मुंबई | D) चेन्नई -
हड़प्पा के अवशेष क्यों कम मिले हैं?
A) मिट्टी के कारण | B) ईंटें चोरी होने के कारण | C) पता नहीं | D) बाढ़ के कारण -
मोहनजोदड़ो की ईंटों का आकार कैसा था?
A) गोलाकार | B) एक समान अनुपात (1:2:4) | C) अनियमित | D) बड़ा -
पाठ में 'अतीत में दबे पाँव' से क्या तात्पर्य है?
A) चुपके से चलना | B) प्राचीन सभ्यता के अवशेषों को खोजना | C) भागना | D) सोना -
मोहनजोदड़ो का जल निकासी तंत्र क्या दर्शाता है?
A) कला | B) नागरिक चेतना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता | C) अमीरपन | D) डर -
क्या उस समय के समाज में व्यापार का प्रमाण मिलता है?
A) हाँ (मुहरों से) | B) नहीं | C) पता नहीं | D) शायद -
लेखक के अनुसार हज़ारों साल पहले का इंसान क्या जानता था?
A) प्रकृति का सम्मान | B) तकनीक | C) नगर व्यवस्था | D) चारों विकल्प सही हैं -
मोहनजोदड़ो के घर एक-दूसरे से कैसे जुड़े थे?
A) सड़क के किनारे व्यवस्थित | B) अव्यवस्थित | C) जंगल में | D) पहाड़ पर -
क्या मोहनजोदड़ो में बड़े युद्धों के प्रमाण मिले हैं?
A) हाँ | B) नहीं | C) पता नहीं | D) शायद -
लेखक ने अपनी यात्रा का वर्णन किस रूप में किया है?
A) रिपोर्टाज | B) नाटक | C) कविता | D) कहानी -
सिंधु घाटी सभ्यता को 'नगरीय सभ्यता' क्यों कहते हैं?
A) क्योंकि वहाँ व्यापार था | B) क्योंकि वहाँ पक्के शहर थे | C) क्योंकि वहाँ खेती थी | D) क्योंकि वहाँ लोग अमीर थे -
लेखक के अनुसार हज़ारों साल पहले भी क्या सुख-सुविधाएं थीं?
A) नहीं | B) हाँ, जल निकासी और स्नानघर | C) पता नहीं | D) शायद -
मोहनजोदड़ो की नगर व्यवस्था आधुनिक शहरी नियोजन के लिए क्या सीख है?
A) बड़ा घर बनाओ | B) पानी की निकासी और सुव्यवस्थित गलियाँ अनिवार्य हैं | C) खेती करो | D) मंदिर बनाओ -
हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाई से हमें क्या पता चलता है?
A) अमीर होने का | B) एक उन्नत और सुसंस्कृत समाज का | C) गरीबी का | D) युद्ध का -
लेखक के अनुसार, प्राचीन भारत की तकनीकी क्षमता का क्या रहस्य था?
A) मशीनें | B) प्रकृति के साथ सामंजस्य और नागरिक चेतना | C) जादू | D) धनी लोग -
सिंधु घाटी सभ्यता की शांतिप्रिय प्रकृति किस प्रमाण से सिद्ध होती है?
A) बड़े हथियारों की कमी | B) हथियारों की भरमार | C) किले | D) मंदिर -
इस पाठ का दार्शनिक संदेश क्या है?
A) समय बीत जाता है | B) सभ्यताएँ आती-जाती हैं लेकिन ज्ञान और नागरिक चेतना शाश्वत है | C) अमीर बनो | D) सब छोड़ दो -
मोहनजोदड़ो के 'महाकुंड' की बनावट क्या बताती है?
A) धार्मिक महत्व | B) स्थापत्य कला की उच्च समझ | C) खेती | D) व्यापार -
लेखक ने मोहनजोदड़ो की सड़कों को 'समानता का प्रतीक' क्यों माना है?
A) क्योंकि वे सीधी थीं | B) क्योंकि वे योजनाबद्ध थीं | C) क्योंकि वे सबको आने-जाने की सुविधा देती थीं | D) क्योंकि वे सुंदर थीं -
क्या सिंधु सभ्यता आधुनिक भारत की नींव है?
A) हाँ, नागरिक चेतना के मामले में | B) नहीं | C) पता नहीं | D) शायद -
लेखक के अनुसार मोहनजोदड़ो किस चीज़ का प्रतीक है?
A) अतीत के गौरव और आधुनिकता की प्रेरणा का | B) विनाश का | C) गरीबी का | D) अज्ञानता का -
हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में किस तरह के समाज का वर्णन है?
A) अमीरी | B) समानता और तकनीकी विकास का | C) दासता | D) युद्ध -
लेखक के अनुसार हज़ारों साल पहले के इंसान का जीवन कैसा था?
A) अव्यवस्थित | B) सुव्यवस्थित और अनुशासित | C) जंगली | D) गरीब -
पाठ में 'अतीत में दबे पाँव' से क्या आशय है?
A) इतिहास की गहराई में उतरना | B) तेज़ी से भागना | C) सो जाना | D) खेलना -
क्या मोहनजोदड़ो का नगर नियोजन आज भी प्रासंगिक है?
A) हाँ, ड्रेनेज व्यवस्था के लिए | B) नहीं | C) पता नहीं | D) शायद -
लेखक की भाषा शैली कैसी है?
A) कठिन | B) चित्रात्मक और भावुक | C) साधारण | D) अस्पष्ट -
इस अध्याय का अंतिम निष्कर्ष क्या है?
A) सभ्यताएँ मरती हैं | B) मानवीय चेतना और तकनीकी उन्नति शाश्वत होती है | C) पैसे कमाओ | D) सब बेकार है
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