5. बाजार संतुलन (Market Equilibrium)
इस पेज पर आपको 5. बाजार संतुलन (Market Equilibrium) के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), परीक्षा उपयोगी नोट्स और ऑनलाइन क्विज़ मिलेंगे। अपने ज्ञान का परीक्षण करने और बोर्ड/प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मॉक टेस्ट में अवश्य भाग लें।
👉 अध्याय का सारांश (Summary)
प्रिय विद्यार्थियों, इस अध्याय में हम व्यष्टि अर्थशास्त्र के एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत 'बाजार संतुलन' का गहराई से अध्ययन करेंगे। बाजार संतुलन वह स्थिति है जहाँ बाजार में किसी वस्तु की मांग की कुल मात्रा उसकी पूर्ति की कुल मात्रा के बिल्कुल बराबर हो जाती है। जिस कीमत पर यह संतुलन स्थापित होता है, उसे संतुलन कीमत कहते हैं, और इस कीमत पर खरीदी और बेची जाने वाली मात्रा को संतुलन मात्रा कहा जाता है। यदि बाजार कीमत संतुलन कीमत से अधिक हो जाती है, तो बाजार में 'अधिपूर्ति' (पूर्ति का मांग से अधिक होना) की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे विक्रेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और कीमत नीचे की ओर गिरती है। इसके विपरीत, यदि कीमत संतुलन कीमत से कम हो जाती है, तो 'अधिमांग' (मांग का पूर्ति से अधिक होना) की स्थिति बनती है, जिससे क्रेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और कीमत ऊपर की ओर चढ़ती है।
अध्याय में फर्मों की संख्या के निश्चित होने और फर्मों के स्वतंत्र प्रवेश तथा बहिर्गमन की स्थितियों में संतुलन के अंतर को समझाया गया है। जब बाजार में फर्मों की संख्या निश्चित होती है, तो संतुलन कीमत का निर्धारण कुल बाजार मांग वक्र और कुल बाजार पूर्ति वक्र के प्रतिच्छेदन बिंदु द्वारा होता है। लेकिन जब बाजार में फर्मों के स्वतंत्र प्रवेश और बहिर्गमन की अनुमति होती है, तो दीर्घकाल में संतुलन कीमत हमेशा फर्मों की न्यूनतम औसत लागत के बिल्कुल बराबर हो जाती है। इस स्थिति में फर्में केवल सामान्य लाभ ही कमा पाती हैं। यदि बाजार में मांग या पूर्ति में कोई परिवर्तन (खिसकाव) होता है, तो उसका संतुलन कीमत और मात्रा पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, पूर्ति स्थिर रहने पर यदि मांग बढ़ती है, तो संतुलन कीमत और मात्रा दोनों में वृद्धि होती है।
अध्याय का अंतिम भाग सरकार द्वारा बाजार में किए जाने वाले हस्तक्षेपों से संबंधित है। इसमें दो मुख्य नीतियां शामिल हैं: उच्चतम निर्धारित कीमत और न्यूनतम निर्धारित कीमत। उच्चतम निर्धारित कीमत (कीमत नियंत्रण) वह अधिकतम सीमा है जो सरकार किसी अनिवार्य वस्तु (जैसे गेहूं, चावल, जीवन रक्षक दवाएं) के लिए तय करती है, और यह हमेशा बाजार द्वारा निर्धारित संतुलन कीमत से कम होती है ताकि गरीब इसका उपभोग कर सकें। इसके कारण अक्सर कालाबाजारी और राशनिंग की आवश्यकता होती है। न्यूनतम निर्धारित कीमत (जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य) वह न्यूनतम सीमा है जो सरकार किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए तय करती है, और यह हमेशा संतुलन कीमत से अधिक होती है, जिससे बाजार में अक्सर आधिक्य की स्थिति पैदा होती है। यह अध्याय बाजार की शक्तियों और सरकारी नीतियों के व्यावहारिक प्रभावों का उत्कृष्ट विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
विशेषता: यह एक 3-Level आधारित यूनीक क्विज़ है। अगले स्तर को अनलॉक करने के लिए छात्रों को वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक स्कोर करने होंगे, जो आपकी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को 100% मजबूत बनाता है।
अध्याय के सभी प्रश्न (Revision Notes)
*नोट: यह सेक्शन रिवीजन के लिए है। अपना ज्ञान परखने के लिए ऊपर दिए गए क्विज़ में भाग लें।
-
बाजार संतुलन की स्थिति में क्या होता है?
A) मांग पूर्ति से अधिक होती है | B) पूर्ति मांग से अधिक होती है | C) मांग और पूर्ति की मात्रा बराबर होती है | D) कीमत शून्य होती है -
जिस कीमत पर बाजार मांग और बाजार पूर्ति बराबर होती हैं उसे क्या कहते हैं?
A) न्यूनतम कीमत | B) संतुलन कीमत | C) अधिकतम कीमत | D) नियंत्रित कीमत -
यदि किसी समय बाजार में मांग की मात्रा पूर्ति की मात्रा से अधिक हो तो उसे क्या कहा जाता है?
A) अधिपूर्ति | B) संतुलन मात्रा | C) अधिमांग | D) शून्य मांग -
बाजार में जब पूर्ति की मात्रा मांग की मात्रा से अधिक हो जाती है तो इस स्थिति को क्या कहते हैं?
A) अधिमांग | B) अधिपूर्ति | C) पूर्ण संतुलन | D) बाजार अभाव -
जब बाजार में अधिपूर्ति की स्थिति होती है तो कीमत की दिशा क्या होती है?
A) ऊपर की ओर बढ़ती है | B) नीचे की ओर गिरती है | C) स्थिर रहती है | D) अनंत हो जाती है -
बाजार में अधिमांग की स्थिति होने पर कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A) कीमत घटने लगती है | B) कीमत बढ़ने लगती है | C) कीमत स्थिर रहती है | D) कीमत शून्य हो जाती है -
फर्मों के स्वतंत्र प्रवेश और बहिर्गमन की स्थिति में दीर्घकालीन संतुलन कीमत किसके बराबर होती है?
A) न्यूनतम औसत लागत के | B) अधिकतम स्थिर लागत के | C) कुल राजस्व के | D) शून्य के -
सरकार द्वारा किसी वस्तु की बेची जाने वाली अधिकतम कानूनी सीमा तय करना क्या कहलाता है?
A) न्यूनतम समर्थन मूल्य | B) उच्चतम निर्धारित कीमत | C) बाजार कीमत | D) संतुलन कीमत -
सरकार द्वारा किसानों के हितों की रक्षा के लिए घोषित न्यूनतम मूल्य को क्या कहा जाता है?
A) कीमत नियंत्रण | B) न्यूनतम समर्थन मूल्य | C) अधिकतम मूल्य | D) संतुलन मूल्य -
उच्चतम निर्धारित कीमत सामान्यतः बाजार की संतुलन कीमत से कहाँ तय की जाती है?
A) संतुलन कीमत से ऊपर | B) संतुलन कीमत से नीचे | C) संतुलन कीमत के बराबर | D) शून्य पर -
न्यूनतम निर्धारित मूल्य सामान्यतः बाजार संतुलन कीमत से कहाँ तय किया जाता है?
A) संतुलन कीमत से नीचे | B) संतुलन कीमत से ऊपर | C) संतुलन कीमत के बराबर | D) ऋणात्मक क्षेत्र में -
पूर्ति स्थिर रहने पर यदि बाजार में वस्तु की मांग बढ़ जाती है तो संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) कीमत घट जाएगी | B) कीमत बढ़ जाएगी | C) कीमत स्थिर रहेगी | D) कीमत शून्य हो जाएगी -
मांग स्थिर रहने पर यदि बाजार में वस्तु की पूर्ति बढ़ जाती है तो संतुलन कीमत क्या होगी?
A) बढ़ जाएगी | B) घट जाएगी | C) अपरिवर्तित रहेगी | D) अनंत हो जाएगी -
उच्चतम निर्धारित कीमत नीति के कारण उत्पन्न कमी को दूर करने के लिए सरकार कौन सा उपाय अपनाती है?
A) कर बढ़ाना | B) राशनिंग और कोटा प्रणाली | C) पूर्ति कम करना | D) निर्यात बढ़ाना -
पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाजार में मांग वक्र का ढाल सामान्यतः कैसा होता है?
A) ऊपर की ओर ढालू | B) ऋणात्मक अथवा नीचे की ओर ढालू | C) पूरी तरह क्षैतिज | D) पूरी तरह लंबवत -
बाजार संतुलन की स्थिति में खरीदी और बेची जाने वाली भौतिक मात्रा को क्या कहा जाता है?
A) अधिमांग मात्रा | B) अधिपूर्ति मात्रा | C) संतुलन मात्रा | D) शून्य मात्रा -
यदि मांग और पूर्ति दोनों समान अनुपात में बढ़ती हैं तो संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) कीमत बढ़ जाएगी | B) कीमत घट जाएगी | C) कीमत पूरी तरह अपरिवर्तित रहेगी | D) कीमत दोगुनी हो जाएगी -
किस स्थिति में क्रेताओं के बीच माल खरीदने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ती है?
A) अधिपूर्ति की स्थिति में | B) अधिमांग की स्थिति में | C) पूर्ण संतुलन की स्थिति में | D) शून्य मांग की स्थिति में -
अधिपूर्ति होने पर माल बेचने के लिए किनके बीच आपस में प्रतिस्पर्धा शुरू होती है?
A) क्रेताओं के बीच | B) विक्रेताओं के बीच | C) सरकार और बैंक के बीच | D) मजदूरों के बीच -
स्वतंत्र प्रवेश की स्थिति में यदि बाजार कीमत न्यूनतम औसत लागत से अधिक हो तो क्या होगा?
A) फर्में बाजार छोड़ देंगी | B) नई फर्में बाजार में प्रवेश करेंगी | C) पूर्ति कम हो जाएगी | D) कीमत और बढ़ेगी -
यदि बाजार में फर्मों की संख्या निश्चित हो और मांग में वृद्धि हो जाए तो संतुलन मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) मात्रा घट जाएगी | B) मात्रा बढ़ जाएगी | C) मात्रा स्थिर रहेगी | D) मात्रा शून्य हो जाएगी -
स्वतंत्र प्रवेश और बहिर्गमन की स्थिति में फर्मों का दीर्घकालीन लाभ कितना होता है?
A) असामान्य अत्यधिक लाभ | B) केवल शून्य आर्थिक लाभ अथवा सामान्य लाभ | C) भयंकर घाटा | D) अनंत लाभ -
जब बाजार कीमत संतुलन कीमत से नीचे होती है तो बाजार में कौन सी स्थिति जन्म लेती है?
A) विक्रेताओं का आधिक्य | B) अधिमांग की स्थिति | C) अधिपूर्ति की स्थिति | D) पूर्ण स्थिरता -
यदि किसी वस्तु की तकनीक में सुधार होने से पूर्ति वक्र दाईं ओर खिसक जाए तो संतुलन कीमत पर क्या असर होगा?
A) कीमत बढ़ जाएगी | B) कीमत घट जाएगी | C) कीमत स्थिर रहेगी | D) कीमत दोगुनी हो जाएगी -
उच्चतम निर्धारित कीमत नीति का समाज के किस वर्ग को लाभ पहुँचाना मुख्य उद्देश्य होता है?
A) अमीर उद्योगपतियों को | B) गरीब और समाज के कमजोर उपभोक्ताओं को | C) विदेशी व्यापारियों को | D) थोक विक्रेताओं को -
न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति का मुख्य उद्देश्य समाज के किस उत्पादक वर्ग को सुरक्षा देना है?
A) शहरी उपभोक्ताओं को | B) किसानों और खेतिहर मजदूरों को | C) विदेशी आयातकों को | D) बैंक प्रबंधकों को -
यदि मांग में गिरावट आती है और पूर्ति स्थिर रहती है तो संतुलन मात्रा की दिशा क्या होगी?
A) मात्रा बढ़ जाएगी | B) मात्रा घट जाएगी | C) मात्रा अपरिवर्तित रहेगी | D) मात्रा अनंत हो जाएगी -
जब मांग वक्र पूरी तरह लोचदार हो और पूर्ति में वृद्धि हो जाए तो संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) कीमत बढ़ जाएगी | B) कीमत घट जाएगी | C) कीमत पूरी तरह स्थिर रहेगी | D) कीमत शून्य हो जाएगी -
उच्चतम निर्धारित कीमत तय करने से बाजार में अक्सर कौन सी अनचाही विकृति या बुराई जन्म लेती है?
A) अधिक उत्पादन | B) कालाबाजारी और ऊंचे मूल्यों पर गुप्त बिक्री | C) कीमतों का गिरना | D) मंदी आना -
यदि किसी वस्तु की पूर्ति में कमी होती है और मांग स्थिर रहती है तो संतुलन मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) मात्रा बढ़ जाएगी | B) मात्रा घट जाएगी | C) मात्रा स्थिर रहेगी | D) मात्रा दोगुनी हो जाएगी -
जब पूर्ति वक्र पूरी तरह बेलोचदार हो और मांग में वृद्धि हो तो संतुलन मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) मात्रा बढ़ जाएगी | B) मात्रा घट जाएगी | C) मात्रा पूरी तरह स्थिर रहेगी | D) मात्रा शून्य हो जाएगी -
न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण बाजार में अनाज की जो आधिक्य मात्रा बचती है सरकार उसका क्या करती है?
A) उसे नष्ट कर देती है | B) बफर स्टॉक के रूप में खुद खरीद लेती है | C) उसे विदेशों को मुफ्त देती है | D) उसे बाजार में खुला छोड़ देती है -
यदि मांग वक्र बाईं ओर खिसकता है और पूर्ति वक्र स्थिर रहता है तो संतुलन कीमत की प्रवृत्ति क्या होगी?
A) बढ़ने की | B) घटने की | C) स्थिर रहने की | D) अनंत होने की -
किस बाजार स्थिति में मांग की मात्रा और पूर्ति की मात्रा का अंतर शून्य हो जाता है?
A) अधिमांग में | B) अधिपूर्ति में | C) बाजार संतुलन की स्थिति में | D) बाजार मंदी में -
स्वतंत्र प्रवेश वाले बाजार में यदि कुछ फर्में घाटा उठा रही हों तो दीर्घकाल में क्या प्रक्रिया होगी?
A) और नई फर्में आएंगी | B) कुछ फर्में बाजार छोड़कर बाहर चली जाएंगी जिससे पूर्ति घटेगी | C) कीमत और गिरेगी | D) उत्पादन बढ़ जाएगा -
फर्मों के स्वतंत्र प्रवेश और बहिर्गमन वाले बाजार में मांग वक्र के दाईं ओर खिसकने पर दीर्घकालीन संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A) कीमत बहुत बढ़ जाती है | B) कीमत पूरी तरह अपरिवर्तित रहती है क्योंकि यह हमेशा न्यूनतम औसत लागत पर टिकी होती है | C) कीमत घट जाती | D) कीमत शून्य हो जाती है -
अधिमांग की स्थिति में बाजार कीमतें अंततः स्वतः ही संतुलन कीमत की ओर ऊपर क्यों चढ़ने लगती हैं इसके पीछे क्या तार्किक कारण है?
A) सरकार आदेश देती है | B) क्रेताओं के बीच माल पाने की प्रतिस्पर्धा के कारण वे अधिक कीमत देने को तैयार हो जाते हैं | C) विक्रेताओं के पास माल खत्म हो जाता है | D) मांग घट जाती है -
यदि किसी वस्तु की मांग और पूर्ति दोनों में एक साथ वृद्धि होती है लेकिन मांग में वृद्धि पूर्ति की तुलना में अधिक हो तो संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) कीमत घट जाएगी | B) कीमत बढ़ जाएगी | C) कीमत स्थिर रहेगी | D) कीमत शून्य हो जाएगी -
उच्चतम निर्धारित कीमत के कारण दुकानों पर लंबी कतारें लगना और माल का न मिलना किस आर्थिक समस्या को दर्शाता है?
A) अधिपूर्ति की समस्या को | B) अधिमांग अथवा बाजार में वस्तु के कृत्रिम अभाव की समस्या को | C) कीमतों के बढ़ने की समस्या को | D) उत्पादन की अधिकता को -
श्रम बाजार में यदि सरकार न्यूनतम मजदूरी कानून के तहत मजदूरी दर को संतुलन दर से बहुत ऊपर तय कर दे तो इसका क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा?
A) सभी मजदूरों को काम मिल जाएगा | B) बाजार में श्रम की पूर्ति आधिक्य होने के कारण बेरोजगारी बढ़ जाएगी | C) मजदूर काम छोड़ देंगे | D) मजदूरी घट जाएगी -
जब बाजार पूर्ति वक्र पूरी तरह लोचदार (क्षैतिज) हो और मांग में भयंकर गिरावट आ जाए तो संतुलन मात्रा और कीमत पर क्या प्रभाव दिखेगा?
A) मात्रा स्थिर रहेगी कीमत गिरेगी | B) मात्रा बहुत घट जाएगी लेकिन कीमत बिल्कुल अपरिवर्तित रहेगी | C) दोनों बढ़ जाएंगे | D) दोनों घट जाएंगे -
यदि किसी वस्तु की मांग और पूर्ति दोनों में समान अनुपात में गिरावट आती है तो बाजार के संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) कीमत बढ़ जाएगी मात्रा स्थिर रहेगी | B) कीमत पूरी तरह स्थिर रहेगी लेकिन संतुलन मात्रा घट जाएगी | C) दोनों स्थिर रहेंगे | D) कीमत घट जाएगी मात्रा बढ़ जाएगी -
राशनिंग प्रणाली के समानांतर 'चोर बाजार' या कालाबाजारी का जन्म होना किस सरकारी नीति की विफलता का प्रत्यक्ष लक्षण माना जाता है?
A) न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति का | B) उच्चतम निर्धारित कीमत अथवा कीमत नियंत्रण नीति का | C) मुक्त व्यापार नीति का | D) कर संकलन नीति का -
स्वतंत्र प्रवेश की स्थिति में दीर्घकालीन बाजार पूर्ति वक्र का आकार कैसा होता है जहाँ कीमत स्थिर रहती है?
A) ऊपर की ओर बढ़ता हुआ | B) पूरी तरह से एक क्षैतिज सीधी रेखा के रूप में अक्ष के समानांतर | C) नीचे की ओर गिरता हुआ | D) एक लंबवत सीधी रेखा -
यदि मांग वक्र पूरी तरह बेलोचदार (लंबवत) हो और तकनीकी प्रगति के कारण पूर्ति वक्र दाईं ओर खिसक जाए तो बाजार पर क्या असर होगा?
A) मात्रा बढ़ेगी कीमत स्थिर रहेगी | B) कीमत भयंकर रूप से गिर जाएगी लेकिन संतुलन मात्रा पूरी तरह अपरिवर्तित रहेगी | C) दोनों बढ़ जाएंगे | D) पूर्ति शून्य हो जाएगी -
कृषि क्षेत्र में न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति के आलोचकों का क्या मुख्य आर्थिक तर्क होता है?
A) इससे अनाज खराब होता है | B) यह उपभोक्ताओं पर कर का बोझ बढ़ाती है और बाजार में अनाज के जबरन आधिक्य को जन्म देती है | C) इससे किसानों को नुकसान होता है | D) इससे निर्यात रुक जाता है -
यदि मांग और पूर्ति दोनों में वृद्धि होती है लेकिन पूर्ति में वृद्धि मांग की तुलना में बहुत अधिक अनुपात में हो तो अंतिम कीमत की दिशा क्या होगी?
A) कीमत बढ़ जाएगी | B) कीमत घट जाएगी | C) कीमत स्थिर रहेगी | D) मात्रा घट जाएगी -
बाजार संतुलन की गतिकी में अदृश्य हाथ (इन्विजिबल हैंड) का क्या अर्थ माना जाता है जो बाजार को नियंत्रित करता है?
A) सरकार का गुप्त हस्तक्षेप | B) मांग और पूर्ति की वे स्वतः संचालित शक्तियां जो असंतुलन होने पर बाजार को वापस संतुलन में लाती हैं | C) केंद्रीय बैंक की नीतियां | D) विदेशी व्यापार का दबाव -
फर्मों की संख्या निश्चित होने पर यदि कुछ नई फर्में पेटेंट कानून के हटने से बाजार में आ जाएं तो पुरानी फर्मों के संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) उनका लाभ बढ़ जाएगा | B) बाजार पूर्ति बढ़ने से कीमत गिरेगी जिससे उनका लाभ और उत्पादन का हिस्सा कम हो जाएगा | C) वे अपनी कीमतें बढ़ा देंगी | D) बाजार बंद हो जाएगा -
यदि किसी वस्तु के पूरक उत्पाद की कीमत बहुत बढ़ जाए तो मूल वस्तु के बाजार संतुलन पर क्या आर्थिक प्रभाव दिखाई देगा?
A) मूल वस्तु की कीमत बढ़ जाएगी | B) मूल वस्तु की मांग घटने से उसकी संतुलन कीमत और मात्रा दोनों गिर जाएंगी | C) मूल वस्तु की पूर्ति बढ़ जाएगी | D) कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा -
स्वतंत्र प्रवेश वाले बाजार में दीर्घकाल में सभी फर्में केवल 'सामान्य लाभ' ही क्यों कमा पाती हैं इसके पीछे क्या विवशता है?
A) क्योंकि सरकार लाभ जब्त कर लेती है | B) चूंकि असामान्य लाभ होने पर नई फर्में आकर पूर्ति बढ़ा देती हैं और घाटा होने पर फर्में बाहर चली जाती हैं | C) क्योंकि फर्में बूढ़ी हो जाती हैं | D) क्योंकि मांग स्थिर होती है -
कीमत नियंत्रण नीति के अंतर्गत जब सरकार कोटा तय करती है तो इसका बाजार के वितरण तंत्र पर क्या सीधा प्रभाव पड़ता है?
A) हर व्यक्ति जितना चाहे उतना माल खरीद सकता है | B) वस्तु की एक निश्चित मात्रा ही प्रत्येक उपभोक्ता को आवंटित की जा सकती है जिससे समानता लाने का प्रयास होता है | C) माल की बिक्री बढ़ जाती है | D) कालाबाजारी पूरी तरह रुक जाती है -
यदि बाजार में अधिपूर्ति की स्थिति उत्पन्न हो और कीमतें न गिरें तो इस तकनीकी रुकावट का क्या कारण हो सकता है?
A) मांग बहुत अधिक है | B) सरकार द्वारा लगाया गया न्यूनतम निर्धारित मूल्य का कानून जो कीमत को नीचे गिरने से रोकता है | C) विक्रेता बहुत अमीर हैं | D) क्रेता माल नहीं चाहते -
मांग वक्र के बाईं ओर खिसकने और पूर्ति वक्र के दाईं ओर खिसकने की घटना यदि एक साथ और समान अनुपात में हो तो संतुलन का परिणाम क्या होगा?
A) मात्रा बढ़ेगी कीमत स्थिर रहेगी | B) कीमत बहुत अधिक गिर जाएगी लेकिन संतुलन मात्रा पूरी तरह अपरिवर्तित रहेगी | C) दोनों शून्य हो जाएंगे | D) संतुलन बिखर जाएगा -
बाजार संतुलन का सिद्धांत यह समझने में कैसे मदद करता है कि किसी वस्तु की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक कीमत क्या होनी चाहिए?
A) यह केवल अमीर की पसंद बताता है | B) यह दर्शाता है कि समाज उपभोक्ता की इच्छा (मांग) और उत्पादक की क्षमता (लागत व पूर्ति) के बीच कहाँ संतुलन पाता है | C) यह सरकारी राजस्व का हिसाब देता है | D) यह विदेशी विनिमय दर तय करता है
0
0
0%
अपना सुझाव दें (Feedback)
वेबसाइट को और बेहतर बनाने के लिए अपने विचार हमें भेजें।