1. 18वीं सदी का राजस्थान (Rajasthan in the 18th Century)
इस पेज पर आपको 1. 18वीं सदी का राजस्थान (Rajasthan in the 18th Century) के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), परीक्षा उपयोगी नोट्स और ऑनलाइन क्विज़ मिलेंगे। अपने ज्ञान का परीक्षण करने और बोर्ड/प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मॉक टेस्ट में अवश्य भाग लें।
👉 अध्याय का सारांश (Summary)
प्रिय अभ्यर्थियों, इस अध्याय में हम '18वीं सदी का राजस्थान' (Rajasthan in the 18th Century) और उस समय की ऐतिहासिक उथल-पुथल के बारे में बहुत ही विस्तार से अध्ययन करेंगे। इतिहास एक निरंतर बहने वाली धारा है और जब आप State PCS, SSC, CET या REET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, तो 18वीं सदी के घटनाक्रमों—विशेषकर मराठा आक्रमण (Maratha Invasion) और राजपूत शासकों की कूटनीति—से ढेरों वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) सीधे तौर पर पूछे जाते हैं। यह अध्याय आपको उस संक्रमण काल (Transition Period) का एक स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करेगा जब मुगल साम्राज्य का पतन हो रहा था और नई शक्तियां उभर रही थीं।
वर्ष 1707 में मुगल सम्राट औरंगजेब (Aurangzeb) की मृत्यु के बाद पूरा भारत एक राजनीतिक शून्यता (Political Vacuum) की स्थिति में आ गया था। इसी समय महाराष्ट्र में मराठों की शक्ति बहुत तेजी से बढ़ रही थी। मराठों ने उत्तर भारत की ओर अपना विस्तार शुरू किया और राजस्थान भी उनके इस प्रभाव से अछूता नहीं रहा। दैनिक जीवन में आपने देखा होगा कि जब घर का मुखिया कमजोर हो जाता है, तो बाहरी लोग घर के मामलों में दखल देने लगते हैं। ठीक ऐसा ही राजस्थान की रियासतों के साथ हुआ। राजपूत शासकों के आपसी झगड़ों और उत्तराधिकार के संघर्षों (Wars of Succession) ने मराठों को यहाँ हस्तक्षेप करने का सुनहरा अवसर प्रदान कर दिया। मराठों ने सबसे पहले 1711 में मेवाड़ (Mewar) क्षेत्र में प्रवेश किया और बाद में बूंदी, जयपुर और मारवाड़ की राजनीति में भी सक्रिय रूप से भाग लेने लगे।
प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से 'हुरड़ा सम्मेलन' (Hurda Conference) का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। मराठों की लूटपाट और बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए राजस्थान के राजपूत शासकों ने एकजुट होने का प्रयास किया। सवाई जयसिंह (Sawai Jai Singh) के प्रयासों से 17 जुलाई 1734 को भीलवाड़ा के हुरड़ा नामक स्थान पर एक विशाल सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में मेवाड़ के महाराणा जगत सिंह द्वितीय, मारवाड़ के अभय सिंह और अन्य प्रमुख शासकों ने भाग लिया। उन्होंने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए कि वे भविष्य में एक-दूसरे की रक्षा करेंगे, लेकिन आपसी अविश्वास और स्वार्थ के कारण यह योजना कभी धरातल पर नहीं उतर सकी।
जब राजपूत शासक मराठों को रोकने में पूरी तरह विफल रहे और उनकी अर्थव्यवस्था चौपट हो गई, तो उन्होंने एक नई शक्ति यानी अंग्रेजों (British) की ओर मदद का हाथ बढ़ाया। वर्ष 1818 तक राजस्थान की लगभग सभी प्रमुख रियासतों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) के साथ आश्रित संधियां (Subsidiary Alliances) कर लीं। इन संधियों ने राजपूताना को मराठों के आतंक से तो बचा लिया, लेकिन बदले में शासकों ने अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता अंग्रेजों के गिरवी रख दी। NCERT बेस और RBSE पाठ्यक्रम पर आधारित ये सभी ऐतिहासिक और कूटनीतिक तथ्य आपकी प्रतियोगी परीक्षा की रणनीति को अत्यंत सटीक और मजबूत बनाएंगे। हमारे इस विशेष क्विज़ के माध्यम से आप इन सभी घटनाओं के बारे में अपनी तैयारी को गहराई से परख सकते हैं।
विशेषता: यह एक 3-Level आधारित यूनीक क्विज़ है। अगले स्तर (Level 2 और 3) को अनलॉक करने के लिए अभ्यर्थियों को वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक स्कोर करने होंगे, जो आपकी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को 100% मजबूत बनाता है।
अध्याय के सभी प्रश्न (Revision Notes)
*नोट: यह सेक्शन रिवीजन के लिए है। अपना ज्ञान परखने के लिए ऊपर दिए गए क्विज़ में भाग लें।
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मराठा शक्ति को सर्वप्रथम किसने संगठित किया था?
A) पेशवा बाजीराव | B) शिवाजी | C) औरंगजेब | D) सवाई जयसिंह -
राजस्थान में सर्वप्रथम 1711 ई. में मराठों ने कहाँ प्रवेश किया था?
A) मारवाड़ | B) आमेर | C) मेवाड़ | D) कोटा -
1720 ई. में 'अटक से कटक' तक मराठा ध्वज फहराने का लक्ष्य किस पेशवा ने निर्धारित किया था?
A) बालाजी बाजीराव | B) बाजीराव | C) माधवराव | D) शिवाजी -
1726 ई. में मराठों ने राजस्थान के किन 2 क्षेत्रों पर आक्रमण किए थे?
A) कोटा व बूंदी | B) मेवाड़ व मारवाड़ | C) जयपुर व जोधपुर | D) डूंगरपुर व बांसवाड़ा -
1728 ई. में किन 2 शासकों ने मराठों को खिराज देना स्वीकार किया था?
A) कोटा और बूंदी | B) डूंगरपुर और बांसवाड़ा | C) जयपुर और जोधपुर | D) भरतपुर और अलवर -
22 अप्रैल 1734 ई. को मराठों ने बूंदी का शासक किसे बना दिया था?
A) सवाई जयसिंह | B) बुधसिंह | C) अभयसिंह | D) बख्तसिंह -
राजस्थान के राजपूत राजाओं ने मराठों की बढ़ती शक्ति को रोकने के लिए 17 जुलाई 1734 को कौन सा सम्मेलन बुलाया?
A) खानवा सम्मेलन | B) हुरड़ा सम्मेलन | C) पुष्कर सम्मेलन | D) मेवाड़ सम्मेलन -
हुरड़ा सम्मेलन राजस्थान के किस वर्तमान जिले में आयोजित किया गया था?
A) उदयपुर | B) भीलवाड़ा | C) अजमेर | D) जयपुर -
हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की थी?
A) सवाई जयसिंह | B) अभयसिंह | C) बख्तसिंह | D) महाराणा जगतसिंह (2) -
हुरड़ा सम्मेलन में आमेर के किस शासक ने भाग लिया था?
A) सवाई जयसिंह | B) मानसिंह | C) प्रतापसिंह | D) रामसिंह -
हुरड़ा सम्मेलन में जोधपुर (मारवाड़) के किस शासक ने भाग लिया था?
A) बख्तसिंह | B) अभयसिंह | C) जसवंतसिंह | D) मालदेव -
राजस्थान के राज्यों में सर्वप्रथम 29 सितम्बर 1803 को किस राज्य ने अंग्रेजों के साथ संधि स्वीकार की?
A) अलवर | B) कोटा | C) भरतपुर | D) बूंदी -
राजस्थान की लगभग सभी रियासतों ने अंग्रेजों के साथ 1817-18 ई. की संधियां कर ली थीं, लेकिन 1823 ई. में सबसे अंत में किस राज्य ने संधि की?
A) सिरोही | B) झालावाड़ | C) प्रतापगढ़ | D) डूंगरपुर -
अंग्रेजों और देशी शासकों के बीच हुई संधियों के परिणामस्वरूप शासकों को अंग्रेजों को कौन सा कर देना पड़ा?
A) जजिया | B) चौथ | C) खिराज | D) जकात -
मराठों द्वारा अन्य शासकों से लिया जाने वाला 'सुरक्षा कर' क्या कहलाता था?
A) खिराज | B) चौथ | C) अहदनामा | D) लगान -
कृषि भूमि पर लगने वाला कर क्या कहलाता था?
A) चौथ | B) खिराज | C) जजिया | D) बट्टा -
शब्दावली के अनुसार 'अहदनामा' का क्या अर्थ है?
A) कृषि कर | B) सुरक्षा कर | C) समझौता या इकरारनामा | D) युद्ध का निमंत्रण -
1817-18 ई. की संधियों के बाद राजस्थान में किनका प्रवेश हुआ जिन्होंने अपने धर्म का प्रचार आरंभ कर दिया?
A) मुगलों का | B) मराठों का | C) ईसाई मिशनरियों का | D) अफगानों का -
अंग्रेजों की संधियों और उनके हस्तक्षेप की जनसाधारण में तीव्र प्रतिक्रिया हुई, जो अंततः किस घटना में परिवर्तित हो गई?
A) 1734 ई. के हुरड़ा सम्मेलन में | B) 1857 ई. के संग्राम में | C) 1947 ई. की आजादी में | D) 1720 ई. के आक्रमण में -
अंग्रेजों ने देशी शासकों पर दबाव डालकर किनके विशेषाधिकार और शक्ति को नष्ट करने का प्रयास किया?
A) किसानों के | B) मजदूरों के | C) सामंतों के | D) व्यापारियों के -
सही मिलान करें:
1. चौथ
2. खिराज
3. अहदनामा
(क) कृषि भूमि पर लगने वाला कर
(ख) मराठों का सुरक्षा कर
(ग) समझौता
A) 1-क, 2-ख, 3-ग | B) 1-ख, 2-क, 3-ग | C) 1-ग, 2-ख, 3-क | D) 1-ख, 2-ग, 3-क -
सही मिलान करें:
1. 1711 ई.
2. 1734 ई.
3. 1803 ई.
(क) भरतपुर की अंग्रेजों से संधि
(ख) मेवाड़ में मराठों का प्रवेश
(ग) हुरड़ा सम्मेलन
A) 1-ख, 2-ग, 3-क | B) 1-क, 2-ख, 3-ग | C) 1-ग, 2-क, 3-ख | D) 1-ख, 2-क, 3-ग -
कथन: 1817-18 ई. की संधियों के परिणामस्वरूप देशी शासकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई।
कारण: शासकों को अंग्रेजों को निरंतर खिराज (कर) देना पड़ता था जिससे खजाने पर भारी भार पड़ा।
A) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है | B) कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है | C) कथन सही है लेकिन कारण गलत है | D) कथन गलत है लेकिन कारण सही है -
कथन: राजस्थान के शासकों ने मराठों के विरुद्ध 1734 ई. में हुरड़ा सम्मेलन बुलाया।
कारण: बूंदी के शासक बुधसिंह को गद्दी पर बैठाना राजस्थान की राजनीति में मराठों का 1 (प्रथम) हस्तक्षेप था जिससे शासक भयभीत हो गए।
A) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है | B) कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है | C) कथन सही है लेकिन कारण गलत है | D) कथन गलत है लेकिन कारण सही है -
कथन: ईसाई मिशनरियों के धर्म प्रचार से राजस्थान की जनसाधारण में तीव्र प्रतिक्रिया हुई।
कारण: इस प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप ही 1734 ई. का हुरड़ा सम्मेलन आयोजित किया गया था।
A) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है | B) कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है | C) कथन सही है लेकिन कारण गलत है | D) कथन और कारण दोनों गलत हैं -
हुरड़ा सम्मेलन में तैयार किए गए 'अहदनामा' (समझौते) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A) अंग्रेजों को कर देना | B) मराठों के विरुद्ध सभी राजपूत शासकों का एकजुट होकर सामना करना | C) मराठों के साथ संधि करना | D) आपस में युद्ध करना -
अंग्रेजों ने शासकों पर दबाव डालकर सामंतों की शक्ति नष्ट करने का प्रयास किया, इसका क्या परिणाम हुआ?
A) सामंतों की प्रतिष्ठा को भारी हानि पहुँची | B) सामंत और अधिक शक्तिशाली हो गए | C) सामंतों ने अंग्रेजों से संधि कर ली | D) सामंत राजा बन गए -
अंग्रेजों के साथ संधियों के बाद राजस्थान के स्वदेशी व्यापार और हस्तशिल्प पर क्या प्रभाव पड़ा?
A) व्यापार बहुत अधिक बढ़ गया | B) वे तेजी से नष्ट होने लगे | C) हस्तशिल्प को संरक्षण मिला | D) कोई प्रभाव नहीं पड़ा -
हुरड़ा सम्मेलन में नागौर के किस शासक ने प्रमुख रूप से भाग लिया था?
A) सवाई जयसिंह | B) अभयसिंह | C) बख्तसिंह | D) जगतसिंह -
1728 ई. में किन 2 क्षेत्रों के शासकों ने मराठों के आक्रमण से बचने के लिए खिराज देना स्वीकार किया था?
A) कोटा और बूंदी | B) मेवाड़ और मारवाड़ | C) डूंगरपुर और बांसवाड़ा | D) भरतपुर और धौलपुर -
22 अप्रैल 1734 ई. को मराठों द्वारा बूंदी के बुधसिंह को शासक बनाना इतिहास में क्या दर्शाता है?
A) मराठों की हार | B) राजस्थान की राजनीति में मराठों का 1 (प्रथम) हस्तक्षेप | C) अंग्रेजों की कूटनीति | D) राजपूतों की एकजुटता -
1803 ई. में अंग्रेजों के साथ भरतपुर द्वारा संधि करने के बाद 1817-18 ई. तक क्या हुआ?
A) अंग्रेज राजस्थान से चले गए | B) लगभग सभी रियासतों ने अंग्रेजों की अधीनता और संधि स्वीकार कर ली | C) मराठों ने अंग्रेजों को हरा दिया | D) राजस्थान पूर्णतः स्वतंत्र हो गया -
1817-18 ई. की संधियों का शासकों के आंतरिक मामलों पर क्या प्रभाव पड़ा?
A) अंग्रेजों को शासकों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का सीधा अवसर मिल गया | B) शासक पूरी तरह से स्वतंत्र हो गए | C) आंतरिक मामले सामंतों को सौंप दिए गए | D) मराठों ने आंतरिक मामलों पर नियंत्रण कर लिया -
पेशवा बाजीराव द्वारा 1720 ई. में 'अटक से कटक' तक झंडा फहराने का क्या अर्थ था?
A) केवल राजस्थान पर अधिकार करना | B) संपूर्ण उत्तर भारत और देश पर मराठा साम्राज्य का विस्तार करना | C) अंग्रेजों से मित्रता करना | D) मुगलों की अधीनता स्वीकार करना -
हुरड़ा सम्मेलन के असफल होने या उसके निर्णयों के लागू न होने का मुख्य कारण क्या माना जाता है?
A) मराठों का डर | B) राजपूत शासकों के आपसी स्वार्थ और उनमें एकता का अभाव | C) अंग्रेजों का दबाव | D) खजाने की कमी -
1817-18 ई. की संधियों का समाज और संस्कृति पर क्या नकारात्मक प्रभाव पड़ा?
A) स्वदेशी हस्तशिल्प को बढ़ावा मिला | B) ईसाई मिशनरियों का प्रवेश हुआ जिन्होंने धर्म परिवर्तन का प्रयास किया | C) सभी धर्मों को समान अधिकार मिले | D) शिक्षा का बहुत अधिक विकास हुआ -
मराठों को राजपूताना में आमंत्रित करने या उनके हस्तक्षेप का पहला अवसर किस रियासत के आंतरिक पारिवारिक विवाद से मिला?
A) मेवाड़ | B) आमेर | C) बूंदी रियासत | D) मारवाड़ -
अंग्रेजों ने 1817-18 ई. की संधियों के माध्यम से राजाओं को मराठों से सुरक्षा का आश्वासन दिया, इसके बदले में राजाओं ने क्या खो दिया?
A) अपना धन और विदेश नीति अंग्रेजों को सौंपकर अपनी स्वतंत्रता खो दी | B) अपनी सेना खो दी | C) अपनी जनता खो दी | D) अपना धर्म खो दिया -
सवाई जयसिंह, अभयसिंह और जगतसिंह (2) ने मिलकर मराठों के खिलाफ जो नीति बनाई, उसका अंतिम परिणाम क्या था?
A) मराठे हमेशा के लिए हार गए | B) 1734 ई. के हुरड़ा सम्मेलन का आयोजन | C) अंग्रेजों का प्रवेश रुक गया | D) मुगलों की वापसी हुई -
1857 ई. की महान क्रांति का बीज राजस्थान में मुख्य रूप से किस कारण से बोया गया था?
A) हुरड़ा सम्मेलन की विफलता से | B) अंग्रेजों की संधियों के कारण उत्पन्न भारी आर्थिक शोषण और धार्मिक हस्तक्षेप से | C) मराठों के शासन से | D) किसानों की बगावत से -
हुरड़ा सम्मेलन के संदर्भ में 3 कथनों पर विचार करें:
1. यह 17 जुलाई 1734 को आयोजित हुआ था।
2. इसकी अध्यक्षता सवाई जयसिंह ने की थी।
3. इसका मुख्य उद्देश्य मराठों की बढ़ती शक्ति को रोकना था।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 | B) 1 और 3 | C) 2 और 3 | D) 1, 2 और 3 -
अंग्रेजों और राजपूताना की संधियों (1817-18 ई.) के परिणामों पर 3 कथनों पर विचार करें:
1. शासकों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई।
2. सामंतों के विशेषाधिकार समाप्त होने लगे और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची।
3. स्वदेशी व्यापार और हस्तशिल्प को बहुत अधिक बढ़ावा मिला।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 | B) 1 और 2 | C) 2 और 3 | D) 1, 2 और 3 -
राजस्थान के इतिहास की 4 प्रमुख घटनाओं को उनके घटित होने के सही कालानुक्रम (पहले से बाद) में व्यवस्थित करें:
1. हुरड़ा सम्मेलन का आयोजन
2. मेवाड़ में मराठों का 1 (प्रथम) प्रवेश
3. भरतपुर द्वारा अंग्रेजों से 1 (प्रथम) संधि
4. बाजीराव का 'अटक से कटक' का लक्ष्य
A) 2, 4, 1, 3 | B) 1, 2, 3, 4 | C) 4, 2, 1, 3 | D) 2, 1, 4, 3 -
कथन: औरंगजेब की मृत्यु के बाद मराठों ने उत्तर भारत में विस्तार की नीति अपनाई।
निष्कर्ष 1: इस नीति के कारण मालवा और गुजरात पर मराठों के आक्रमण होने लगे।
निष्कर्ष 2: मराठों के इन आक्रमणों से राजस्थानी शासकों की चिंता बहुत अधिक बढ़ गई।
A) केवल निष्कर्ष 1 सही है | B) केवल निष्कर्ष 2 सही है | C) निष्कर्ष 1 और 2 दोनों सही हैं | D) न तो निष्कर्ष 1 और न ही निष्कर्ष 2 सही है -
कथन: 1817-18 ई. की संधियों के बाद अंग्रेजों ने देशी शासकों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया।
निष्कर्ष 1: इस हस्तक्षेप से तंग आकर शासकों ने अंग्रेजों का कड़ा विरोध किया और तुरंत संधियाँ तोड़ दीं।
निष्कर्ष 2: अंग्रेजों के दबाव के कारण सामंतों की प्रतिष्ठा को भारी हानि पहुँची क्योंकि शासकों ने उनकी शक्ति नष्ट करने का प्रयास किया।
A) केवल निष्कर्ष 1 सही है | B) केवल निष्कर्ष 2 सही है | C) निष्कर्ष 1 और 2 दोनों सही हैं | D) न तो निष्कर्ष 1 और न ही निष्कर्ष 2 सही है -
हुरड़ा सम्मेलन में भाग लेने वाले 3 प्रमुख शासकों और उनकी रियासतों का सही मिलान कौन सा है?
1. महाराणा जगतसिंह (2) - मेवाड़
2. सवाई जयसिंह - आमेर
3. अभयसिंह - नागौर
इनमें से कौन-सा/से मिलान सही है/हैं?
A) केवल 1 | B) 1 और 2 | C) 2 और 3 | D) 1, 2 और 3 -
1817-18 ई. की संधियों का राजस्थान पर क्या भयानक आर्थिक प्रभाव पड़ा?
1. शासकों को अंग्रेजों को भारी खिराज (कर) देना पड़ा।
2. स्वदेशी हस्तशिल्प और व्यापार नष्ट होने लगा।
3. राजस्थान में औद्योगीकरण और कल-कारखाने तेजी से बढ़ने लगे।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 | B) 1 और 2 | C) 2 और 3 | D) 1, 2 और 3 -
बूंदी के मामले में मराठा हस्तक्षेप के संबंध में क्या पूर्णतः सही है?
1. यह घटना 22 अप्रैल 1734 ई. को हुई थी।
2. मराठों ने बुधसिंह को हटाकर नए शासक को गद्दी पर बैठाया था।
3. यह राजस्थान की राजनीति में मराठों का 1 (प्रथम) सीधा हस्तक्षेप था।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 | B) 1 और 3 | C) 2 और 3 | D) 1, 2 और 3 -
मराठों के राजस्थान प्रवेश के कारणों और प्रभावों के संबंध में 3 कथनों पर विचार करें:
1. 1728 ई. में डूंगरपुर-बांसवाड़ा ने मराठों को खिराज देना स्वीकार किया।
2. पेशवा बाजीराव ने 1720 ई. में मराठा साम्राज्य के विस्तार की आक्रामक नीति अपनाई।
3. राजस्थानी शासकों ने अपनी इच्छा से मराठों का भव्य स्वागत किया था।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 | B) 1 और 2 | C) 2 और 3 | D) 1, 2 और 3 -
1803 ई. की भरतपुर संधि और 1817-18 ई. की संधियों के बीच मुख्य ऐतिहासिक संबंध या अंतर क्या था?
A) भरतपुर ने सबसे अंत में संधि की थी | B) भरतपुर ने सर्वप्रथम (1803 में) संधि की, जबकि 1817-18 तक लगभग सभी अन्य रियासतें भी अंग्रेजों के पूर्ण अधीन हो गईं | C) भरतपुर ने संधि तोड़ दी और बाकी ने मान ली | D) दोनों संधियों में अंग्रेजों की हार हुई थी -
हुरड़ा सम्मेलन के दौरान तय किए गए 'अहदनामे' (समझौते) के अनुसार 1 महत्वपूर्ण शर्त क्या थी जो कभी पूरी नहीं हो सकी?
A) सभी राजा मुगलों के अधीन हो जाएंगे | B) वर्षा ऋतु समाप्त होने के बाद सभी राजपूत शासक रामपुरा में एकत्र होकर मराठों के खिलाफ साझा युद्ध करेंगे | C) सभी राजा मराठों को खिराज देंगे | D) राजपूत राजा अपनी सेनाएं भंग कर देंगे -
मराठों द्वारा वसूले जाने वाले 'चौथ' और 'खिराज' करों में बुनियादी सैद्धांतिक अंतर क्या था?
A) दोनों 1 ही थे | B) चौथ 1 सुरक्षा कर था जो मराठे बाहरी आक्रमण से बचाने के नाम पर लेते थे, जबकि खिराज सीधे कृषि भूमि की उपज पर लगने वाला कर था | C) खिराज सुरक्षा के लिए था और चौथ कृषि के लिए | D) दोनों कर अंग्रेज वसूलते थे -
राजपूत शासकों ने 1817-18 ई. में अंग्रेजों के साथ अधीनता की संधियाँ क्यों स्वीकार कीं?
A) क्योंकि वे अंग्रेजों से प्रेम करते थे | B) मराठों के निरंतर आक्रमणों, लूटमार और आंतरिक सामंती विद्रोहों से पूरी तरह परेशान होकर सुरक्षा के लिए | C) क्योंकि मुगलों ने ऐसा आदेश दिया था | D) क्योंकि उन्हें विदेश व्यापार करना था -
1857 ई. के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के लिए 1817-18 ई. की संधियां किस प्रकार प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार बनीं?
A) संधियों से जनता अमीर हो गई थी | B) संधियों के बाद हुए आर्थिक शोषण, शासकों के अधिकारों में कमी और ईसाई मिशनरियों के धार्मिक हस्तक्षेप ने जनता में भारी असंतोष भर दिया था | C) संधियों से सेना बहुत खुश थी | D) संधियों के कारण मराठे वापस आ गए थे -
मराठों की 'मालवा और गुजरात' में विस्तार की नीति का सीधा असर राजस्थान पर क्यों पड़ा?
A) क्योंकि राजस्थान बीच में पड़ता था | B) मालवा और गुजरात की सीमाएँ राजस्थान से लगती थीं, अतः वहाँ मराठों के नियंत्रण से राजस्थान की रियासतों (जैसे मेवाड़ और हाड़ौती) के लिए सीधा भौगोलिक और सामरिक खतरा पैदा हो गया | C) क्योंकि राजस्थानी राजाओं ने उन्हें बुलाया था | D) क्योंकि मराठों को राजस्थान की जलवायु पसंद थी -
हुरड़ा सम्मेलन (1734 ई.) के ऐतिहासिक महत्व का सबसे सटीक मूल्यांकन क्या है?
A) यह पूरी तरह सफल रहा और मराठे भाग गए | B) यह राजपूताना के शासकों को 1 मंच पर लाने का 1 बड़ा कूटनीतिक प्रयास था, यद्यपि आपसी अविश्वास और व्यक्तिगत स्वार्थों के कारण यह जमीनी स्तर पर विफल रहा | C) यह अंग्रेजों को भगाने के लिए था | D) यह मुगलों का 1 षड्यंत्र था -
अंग्रेजों ने संधियों के माध्यम से राजस्थान के शासकों को क्या लालच दिया था जो बाद में उनके लिए जाल साबित हुआ?
A) विदेशी व्यापार में भारी छूट का | B) मराठों तथा पिंडारियों के हमलों से पूरी सुरक्षा और राज्य की आंतरिक सत्ता में स्थिरता का आश्वासन | C) मुग़ल सम्राट बनाने का | D) नए प्रदेश जीतने का -
1817-18 ई. की संधियों के बाद राजस्थान की जनता की स्थिति कैसी हो गई थी?
A) वे पूरी तरह कर-मुक्त हो गए | B) राजाओं ने अंग्रेजों को खिराज देने के लिए जनता पर करों का भारी बोझ डाल दिया, जिससे किसानों और आम लोगों का भीषण शोषण होने लगा | C) जनता को सरकारी नौकरियाँ मिल गईं | D) जनता का राजनीतिक प्रभाव बढ़ गया -
हुरड़ा सम्मेलन में 3 प्रमुख शासकों (सवाई जयसिंह, अभयसिंह, जगतसिंह 2) के शामिल होने के बावजूद यह मराठों को क्यों नहीं रोक सका?
A) मराठों की सेना में अंग्रेज शामिल थे | B) सम्मेलन के बाद इन शासकों ने समझौते की शर्तों (अहदनामे) का पालन नहीं किया और एकजुट होकर सैन्य कार्यवाही करने में पूरी तरह विफल रहे | C) हुरड़ा में भारी बाढ़ आ गई थी | D) मुगलों ने शासकों को रोक दिया था -
मराठों का 1711 ई. में मेवाड़ में प्रवेश और 1720 ई. में 'अटक से कटक' का लक्ष्य, राजस्थान के इतिहास में क्या संकेत देते हैं?
A) शांति की शुरुआत | B) मुग़ल साम्राज्य के पतन के बाद उत्पन्न राजनीतिक शून्यता को भरने के लिए मराठों का राजस्थान और उत्तर भारत पर आक्रामक सैन्य और राजनीतिक विस्तार | C) अंग्रेजों के डर का | D) राजपूतों के स्वर्णिम युग का
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