5. आजादी से पूर्व सरकार का स्वरूप (Form of Government before Independence)
इस पेज पर आपको 5. आजादी से पूर्व सरकार का स्वरूप (Form of Government before Independence) के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), परीक्षा उपयोगी नोट्स और ऑनलाइन क्विज़ मिलेंगे। अपने ज्ञान का परीक्षण करने और बोर्ड/प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मॉक टेस्ट में अवश्य भाग लें।
👉 अध्याय का सारांश (Summary)
प्रिय अभ्यर्थियों, इस अध्याय में हम 'आजादी से पूर्व सरकार का स्वरूप' (Form of Government before Independence) के बारे में विस्तार से समझेंगे। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ जनता अपना शासक स्वयं चुनती है, लेकिन क्या आजादी से पहले भी व्यवस्था ऐसी ही थी? बिल्कुल नहीं। जब आप State PCS, SSC, CET या REET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, तो रियासतकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, जागीरदारी प्रथा और ब्रिटिश संधियों से संबंधित कई वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) आते हैं। यह अध्याय आपको उस पुरानी प्रशासनिक प्रणाली का एक स्पष्ट और विस्तृत चित्र प्रस्तुत करता है।
आजादी से पूर्व राजस्थान अनेक छोटी-बड़ी रियासतों (Princely States) में बंटा हुआ था। प्रत्येक रियासत का एक स्वतंत्र शासक होता था जिसे राजा, महाराणा या राव कहा जाता था। राजा ही राज्य की सर्वोच्च शक्ति होता था। उसके पास कानून बनाने, न्याय करने और सेना का संचालन करने के असीमित अधिकार होते थे। लेकिन राजा अकेले शासन नहीं चला सकता था। दैनिक जीवन का उदाहरण लें तो जैसे वर्तमान में मुख्यमंत्री की सहायता के लिए मंत्री होते हैं, वैसे ही राजा की सहायता के लिए दीवान, बख्शी (सेनापति), और खजांची (कोषाध्यक्ष) होते थे। राजशाही व्यवस्था में राजा का पद पूरी तरह से वंशानुगत (Hereditary) होता था, यानी राजा के बाद उसका सबसे बड़ा पुत्र ही गद्दी पर बैठता था।
प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से राजस्थान की 'जागीरदारी प्रथा' (Jagirdari System) को समझना बहुत ही महत्वपूर्ण है। राजा अपनी पूरी रियासत की भूमि का सीधा प्रबंधन नहीं कर सकता था, इसलिए वह राज्य को छोटे-छोटे हिस्सों (जागीरों) में बांटकर अपने भाइयों, सगे-संबंधियों या वीर सरदारों को सौंप देता था। इन जागीरों के स्वामी को जागीरदार (Jagirdar) कहा जाता था। जागीरदार अपने क्षेत्र से लगान (Tax) वसूल करता था और युद्ध के समय राजा को सैन्य सहायता (Military Assistance) प्रदान करता था। यह व्यवस्था रक्त संबंध और भाईचारे की भावना पर आधारित थी।
समय के साथ, जब मराठों और पिंडारियों का आक्रमण बढ़ा, तो राजपूत शासकों ने सुरक्षा के लिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) की ओर रुख किया। वर्ष 1818 तक राजस्थान की लगभग सभी प्रमुख रियासतों ने अंग्रेजों के साथ आश्रित संधियां (Subsidiary Alliances) कर लीं। इन संधियों के बाद राजाओं की बाहरी स्वतंत्रता समाप्त हो गई और ब्रिटिश शासन का हस्तक्षेप बढ़ गया। पूरे राजपूताना पर नियंत्रण रखने के लिए अंग्रेजों ने वर्ष 1832 में अजमेर में 'राजपूताना रेजीडेंसी' की स्थापना की और इसके सर्वोच्च अधिकारी को एजेंट टू गवर्नर जनरल (Agent to Governor General - AGG) कहा गया। NCERT बेस पर आधारित ये ऐतिहासिक प्रशासनिक तथ्य आपकी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बेहद आवश्यक हैं, इसलिए क्विज़ में पूछे गए हर प्रश्न का अभ्यास गंभीरता से करें।
विशेषता: यह एक 3-Level आधारित यूनीक क्विज़ है। अगले स्तर (Level 2 और 3) को अनलॉक करने के लिए अभ्यर्थियों को वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक स्कोर करने होंगे, जो आपकी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को 100% मजबूत बनाता है。
अध्याय के सभी प्रश्न (Revision Notes)
*नोट: यह सेक्शन रिवीजन के लिए है। अपना ज्ञान परखने के लिए ऊपर दिए गए क्विज़ में भाग लें।
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आजादी से पूर्व राजस्थान में राज्य की संपूर्ण शक्ति का सर्वोच्च केंद्र कौन होता था?
A) दीवान | B) राजा | C) बख्शी | D) जागीरदार -
राजा को शासन कार्य में सहायता हेतु मंत्रियों की नियुक्ति की जाती थी, प्रमुख मंत्री को क्या कहते थे?
A) बख्शी | B) खजांची | C) दीवान | D) परगना अधिकारी -
सेना को वेतन देने तथा सेना संबंधी अन्य कार्यों की जिम्मेदारी किस 1 अधिकारी की होती थी?
A) खजांची | B) राजा | C) बख्शी | D) प्रधान -
राज्य की आमदनी और खर्च के हिसाब को सुरक्षित रखने वाला अधिकारी क्या कहलाता था?
A) दीवान | B) खजांची | C) बख्शी | D) मंत्री -
राज्य को कई परगनों में बांटा गया था, परगने में शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी होती थी?
A) बख्शी | B) परगना अधिकारी | C) खजांची | D) ग्राम पंचायत -
आजादी से पूर्व राज्य के प्रशासन की सबसे छोटी इकाई क्या थी?
A) परगना | B) ग्राम | C) संभाग | D) जिला -
ग्राम का प्रशासन मुख्य रूप से किसके द्वारा किया जाता था?
A) राजा द्वारा | B) दीवान द्वारा | C) ग्राम पंचायत द्वारा | D) खजांची द्वारा -
राजस्थान में जागीरदारी व्यवस्था मुख्य रूप से किस भावना पर आधारित थी?
A) स्वामी और सेवक की भावना | B) रक्त संबंध एवं कुलीय भावना | C) विदेशी शासन | D) व्यापारी और ग्राहक की भावना -
वह पत्र जिसमें शासक द्वारा प्रदान की गई जागीर का स्पष्ट उल्लेख होता था, क्या कहलाता था?
A) मनसबदारी | B) जागीर पट्टा | C) ताम्रपत्र | D) प्रशस्ति -
शांति काल में जागीरदार का मुख्य कार्य क्या होता था?
A) विदेशी व्यापार करना | B) अपनी जागीर में शांति और शासन व्यवस्था बनाए रखना | C) राजा से युद्ध करना | D) मुद्रा छापना -
जागीरदारी व्यवस्था के उदय का मुख्य कारण क्या था?
A) बाहरी आक्रमण | B) अंग्रेजों का शासन | C) राजपूतों की विभिन्न शाखाओं का अपने राज्य स्थापित करना | D) लोकतंत्र की स्थापना -
मुगल काल में प्रचलित प्रशासनिक प्रणाली का नाम क्या था जिसका प्रभाव राजस्थान पर भी पड़ा?
A) सामंतवाद | B) जागीर पट्टा | C) मनसबदारी | D) लोकतंत्र -
राजस्थान की रियासतों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधियां किस 1 वर्ष में की थीं?
A) 1818 में | B) 1857 में | C) 1947 में | D) 1935 में -
भारत सरकार अधिनियम 1935 को किस तिथि को लागू किया गया था?
A) 15 अगस्त 1947 | B) 1 अप्रैल 1937 | C) 26 जनवरी 1950 | D) 1 नवम्बर 1956 -
1935 के अधिनियम के तहत राजस्थान के किस केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन संघीय सरकार के अधीन लाया गया?
A) जयपुर | B) अजमेर-मेरवाड़ा | C) जोधपुर | D) मेवाड़ -
1947 में स्वतंत्रता के बाद ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए कौन सा 1 अधिनियम पारित किया गया?
A) जागीरदारी अधिनियम | B) ग्राम पंचायत अधिनियम 1947 | C) मनसबदारी अधिनियम | D) भारत सरकार अधिनियम -
राजस्थान की प्रथम विधानसभा के लिए चुनाव किस वर्ष हुए थे?
A) 1947 में | B) 1950 में | C) 1952 में | D) 1956 में -
राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री कौन बने थे?
A) टीकाराम पालीवाल | B) मोहनलाल सुखाड़िया | C) जयनारायण व्यास | D) हीरालाल शास्त्री -
जागीरदार को शासक द्वारा क्या माना जाता था?
A) नौकर | B) विदेशी | C) भाई-बंधु | D) सेनापति -
मध्यकाल में राजस्थान की संपूर्ण व्यवस्था किस आधार पर टिकी हुई थी?
A) औद्योगिक व्यवस्था | B) राजा और जागीरदार के आपसी संबंधों पर | C) व्यापारिक नियमों पर | D) विदेशी सहायता पर -
सही मिलान करें:
1. दीवान
2. बख्शी
3. खजांची
(क) आमदनी-खर्च का हिसाब
(ख) प्रमुख मंत्री
(ग) सेना का वेतन
A) 1-क, 2-ख, 3-ग | B) 1-ख, 2-ग, 3-क | C) 1-ग, 2-ख, 3-क | D) 1-ख, 2-क, 3-ग -
सही मिलान करें:
1. ग्राम
2. परगना
3. राज्य
(क) राज्य की सबसे छोटी इकाई
(ख) शांति व्यवस्था अधिकारी
(ग) राजा का नियंत्रण
A) 1-क, 2-ख, 3-ग | B) 1-ख, 2-ग, 3-क | C) 1-ग, 2-ख, 3-क | D) 1-क, 2-ग, 3-ख -
कथन: राजस्थान में जागीरदारी व्यवस्था यूरोप की सामंतवादी व्यवस्था से भिन्न थी।
कारण: यहाँ जागीरदार को राजा का सेवक नहीं बल्कि उसका भाई-बंधु या हिस्सेदार माना जाता था।
A) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है | B) कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है | C) कथन सही है लेकिन कारण गलत है | D) कथन गलत है लेकिन कारण सही है -
कथन: 1818 की संधियों के बाद जागीरदारों का प्रभाव कम होने लगा।
कारण: अंग्रेजों के संरक्षण के कारण शासकों की जागीरदारों पर निर्भरता समाप्त हो गई।
A) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है | B) कथन और कारण दोनों सही हैं लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है | C) कथन सही है लेकिन कारण गलत है | D) कथन गलत है लेकिन कारण सही है -
रियासती प्रशासन में राजा अपने मंत्रियों को नियुक्त करता था। समय के साथ इन मंत्रियों को क्या कहा जाने लगा?
A) प्रधानमंत्री | B) राष्ट्रपति | C) दीवान | D) राज्यपाल -
जागीरदारों का युद्ध के समय क्या प्रमुख दायित्व होता था?
A) खजाना छिपाना | B) अपनी सेना के साथ शासक की सहायता करना | C) राज्य छोड़कर चले जाना | D) व्यापार करना -
मुगलों से संधि के बाद राजपूत शासकों की जागीरदारी व्यवस्था में 1 क्या बड़ा बदलाव आया?
A) जागीरदारी पूरी तरह खत्म हो गई | B) शासकों की जागीरदारों पर निर्भरता कम हो गई और मनसबदारी प्रथा का प्रभाव पड़ा | C) जागीरदार शासक बन गए | D) मुगल सेना को हटा दिया गया -
1935 के भारत सरकार अधिनियम का प्रथम बार लागू होना किस 1 बात का प्रतीक था?
A) पूर्ण स्वतंत्रता | B) रियासतों में ब्रिटिश शासन की समाप्ति | C) संवैधानिक सुधारों की शुरुआत | D) मुगल शासन की वापसी -
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब 1950 में नया संविधान लागू हुआ, तो राजस्थान में किस 1 प्रकार की प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित हुई?
A) सामंतवादी व्यवस्था | B) लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था | C) राजशाही | D) सैनिक शासन -
ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य क्या होता था?
A) विदेशी नीतियां बनाना | B) स्थानीय विवादों का निपटारा करना और गांव की सुविधाएं देखना | C) मुद्रा जारी करना | D) सेना का संचालन करना -
परगना अधिकारी अपने क्षेत्र (परगने) में किस 1 कार्य के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी था?
A) केवल कर वसूली | B) शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना | C) केवल खेती करना | D) विद्यालय खोलना -
राजस्थान में कछवाहा, राठौड़ और चौहान राजवंशों ने अपने-अपने राज्यों की स्थापना की। इनकी प्रशासनिक व्यवस्था का आधार क्या था?
A) विदेशी मॉडल | B) विजेता और विजित का मॉडल | C) रक्त संबंध और गोत्रिय प्रणाली | D) व्यापारिक मॉडल -
अंग्रेजों से 1818 में संधियां करने के बाद शासकों को सबसे बड़ा क्या फायदा हुआ?
A) उनके राज्य बहुत बड़े हो गए | B) उन्हें बाह्य आक्रमणों और आंतरिक विद्रोहों से अंग्रेजों का संरक्षण मिल गया | C) उन्हें बहुत सारा धन मिला | D) उन्हें विदेशी नागरिकता मिल गई -
जागीर पट्टा महत्त्वपूर्ण दस्तावेज था। इसमें जागीरदार के लिए क्या 1 विशेष बात लिखी होती थी?
A) जागीर का क्षेत्रफल | B) जागीर की आय और उससे ली जाने वाली सेना व कर (खिराज) का विवरण | C) केवल राजा का नाम | D) केवल नदी का नाम -
टीकाराम पालीवाल के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री बनने से पहले, प्रशासन की बागडोर किसके हाथ में थी?
A) राजाओं और रियासतों के हाथ में | B) मनसबदारों के हाथ में | C) सीधे विदेशी कंपनियों के हाथ में | D) केवल ग्राम पंचायतों के हाथ में -
जागीरदार अपनी जागीर का स्वामी नहीं माना जाता था, बल्कि वह केवल जागीर से क्या प्राप्त कर सकता था?
A) स्वतंत्र राज्य बनाने का अधिकार | B) जागीर से आय (राजस्व) प्राप्त करने का अधिकार | C) राजा को पद से हटाने का अधिकार | D) नई मुद्रा चलाने का अधिकार -
प्रथम विधानसभा के 1952 में गठन से राजस्थान की राजनीतिक व्यवस्था में क्या ऐतिहासिक परिवर्तन आया?
A) राजतंत्र हमेशा के लिए मजबूत हो गया | B) जनता द्वारा चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना हुई | C) अंग्रेजों का शासन वापस आ गया | D) जागीरदारी प्रथा और मजबूत हो गई -
आजादी से पूर्व राजस्थान में राजा के आदेश को क्या माना जाता था?
A) 1 सलाह | B) सर्वोच्च कानून और न्याय का आधार | C) 1 निवेदन | D) 1 व्यापारिक नियम -
मुगल काल में 'मनसब' शब्द का सामान्य अर्थ क्या होता था?
A) 1 विशेष प्रकार का कर | B) प्रशासनिक पद या दर्जा (रैंक) | C) 1 हथियार | D) 1 धार्मिक ग्रंथ -
अजमेर-मेरवाड़ा विशेष क्षेत्र क्यों था?
A) क्योंकि वह 1 स्वतंत्र रियासत था | B) क्योंकि वह 1 केंद्र शासित (चीफ कमिश्नर) प्रांत था जिस पर सीधे ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण था | C) क्योंकि वह मुगलों की राजधानी था | D) क्योंकि वहाँ कोई शासन नहीं था -
प्रशासनिक अधिकारियों और उनके कार्यों के 3 कथनों पर विचार करें:
1. बख्शी सेना का वेतन और सैन्य कार्य देखता था।
2. खजांची राज्य की आमदनी-खर्च का हिसाब रखता था।
3. दीवान राजा का प्रमुख मंत्री होता था।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 | B) 1 और 2 | C) 2 और 3 | D) 1, 2 और 3 -
जागीरदारी व्यवस्था के संदर्भ में 3 कथनों पर विचार करें:
1. यह रक्त संबंध पर आधारित थी।
2. जागीरदार को जागीर पट्टा दिया जाता था।
3. 1818 की संधियों के बाद जागीरदारों की शक्ति बहुत बढ़ गई।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 | B) 1 और 2 | C) 2 और 3 | D) 1, 2 और 3 -
ऐतिहासिक घटनाओं को उनके घटित होने के सही कालानुक्रम में व्यवस्थित करें:
1. टीकाराम पालीवाल का मुख्यमंत्री बनना
2. अंग्रेजों के साथ रियासतों की संधियाँ
3. 1935 का भारत सरकार अधिनियम लागू होना
A) 1, 2, 3 | B) 2, 1, 3 | C) 2, 3, 1 | D) 3, 2, 1 -
कथन: मुगलों से संधियों के बाद राजपूत शासकों ने अपने प्रशासन में मुगल प्रणाली को अपनाया।
निष्कर्ष 1: शासकों ने मनसबदारी प्रथा के आधार पर अपनी सेना और जागीरों को व्यवस्थित किया।
निष्कर्ष 2: शासकों ने अपनी भाषा पूरी तरह फारसी कर दी।
A) केवल निष्कर्ष 1 सही है | B) केवल निष्कर्ष 2 सही है | C) निष्कर्ष 1 और 2 दोनों सही हैं | D) न तो 1 और न ही 2 सही है -
राजपूत राज्यों में शासक मृत्यु के बाद अपना उत्तराधिकारी कैसे चुनते थे, और उसमें जागीरदारों की क्या 1 भूमिका थी?
A) चुनाव द्वारा; जागीरदार वोट देते थे | B) उत्तराधिकारी सामान्यतः बड़ा पुत्र होता था; जागीरदारों की सहमति और तिलक से मान्यता मिलती थी | C) अंग्रेज तय करते थे; जागीरदार कुछ नहीं करते थे | D) मुगल सम्राट तय करता था; जागीरदार कर देते थे -
राजस्थान में 1818 की संधियों के बाद शासक अपनी सेना के बजाय किस 1 शक्ति पर अधिक निर्भर रहने लगे?
A) मराठों पर | B) मुगलों पर | C) अंग्रेज कंपनी की सैन्य शक्ति पर | D) किसानों पर -
1935 के अधिनियम के संदर्भ में 2 तथ्यों पर विचार करें:
1. इसे 1 अप्रैल 1937 को लागू किया गया।
2. इसके तहत अजमेर-मेरवाड़ा का प्रशासन संघीय सरकार द्वारा नियंत्रित हुआ।
क्या ये दोनों कथन सही हैं?
A) केवल 1 सही है | B) केवल 2 सही है | C) दोनों सही हैं | D) दोनों गलत हैं -
जागीरदारी व्यवस्था में 'भाई-बंधु' की भावना का सबसे बड़ा लाभ क्या था?
A) इससे कर अधिक मिलता था | B) इससे शासक और जागीरदारों के बीच युद्ध के समय 1 अटूट विश्वास और सहयोग बना रहता था | C) इससे विदेशी आक्रमण नहीं होते थे | D) इससे कृषि उपज बढ़ती थी -
राजस्थान में जागीरदारी व्यवस्था का मूल 1 आधार 'भूमि का बंटवारा' था, यह बंटवारा किसके बीच होता था?
A) व्यापारियों के बीच | B) राजपूत शासक और उसके गोत्र/वंश के कुलीन सरदारों के बीच | C) अंग्रेजों और शासकों के बीच | D) मुगलों और राजपूतों के बीच -
टीकाराम पालीवाल के 1952 में प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री बनने का मुख्य कारण क्या था?
A) उन्हें राजा ने नियुक्त किया था | B) वे 1952 के 1 (प्रथम) विधानसभा चुनावों में जनता द्वारा चुनकर बहुमत से आए थे | C) उन्होंने युद्ध जीता था | D) वे अंग्रेजों के अधिकारी थे -
राज्य प्रशासन में 'परगना' का स्थान कहाँ आता था?
A) ग्राम से नीचे | B) राज्य और ग्राम के बीच की 1 प्रशासनिक इकाई | C) राज्य से ऊपर | D) केवल शहरों में -
अंग्रेजों के शासनकाल में रियासतों के आंतरिक प्रशासन पर क्या प्रभाव पड़ा?
A) रियासतें पूरी तरह स्वतंत्र हो गईं | B) अंग्रेज रेजिडेंट्स के माध्यम से आंतरिक प्रशासन में बहुत अधिक हस्तक्षेप होने लगा | C) रियासतों ने प्रशासन बंद कर दिया | D) प्रशासन पूरी तरह जनता को सौंप दिया गया -
ग्राम पंचायत अधिनियम 1947 पारित करने का सबसे प्रमुख उद्देश्य क्या था?
A) ग्राम पंचायतों को कर लगाने से रोकना | B) ग्राम पंचायतों को वैधानिक दर्जा देकर स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना | C) ग्राम पंचायतों को समाप्त करना | D) ग्राम पंचायतों को विदेश भेजना -
मनसबदारी व्यवस्था जो मुगलों की देन थी, उसने राजपूत जागीरदारी में क्या बदलाव किया?
A) जागीरदार किसानों के साथ रहने लगे | B) जागीरों का निर्धारण 1 निश्चित सैन्य पद (मनसब) और वेतन के आधार पर होने लगा | C) जागीरें केवल मुगलों को दी जाने लगीं | D) जागीरें पूरी तरह खत्म कर दी गईं -
आजादी से पहले की न्याय व्यवस्था में सबसे बड़ा दोष क्या था?
A) न्याय बहुत धीमा था | B) लिखित और समान कानूनों का अभाव था, राजा का आदेश ही कानून होता था | C) न्याय विदेशी भाषा में होता था | D) केवल जागीरदार न्याय करते थे -
जागीर पट्टे में जागीरदार को क्या शर्त पूरी करनी होती थी?
A) उसे राजा को 1 किला देना होता था | B) उसे निश्चित आय के आधार पर राजा को सैन्य सहायता और कुछ कर (खिराज) देना होता था | C) उसे 1 विद्यालय बनाना होता था | D) उसे व्यापार करना होता था -
3 कथनों पर विचार करें:
1. राजा राज्य का सर्वोच्च शासक होता था।
2. दीवान राजा का मुख्य सलाहकार होता था।
3. बख्शी केवल खजाना देखता था।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A) केवल 1 | B) 1 और 2 | C) 2 और 3 | D) 1, 2 और 3 -
रियासतों के शासकों ने 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी से संधियां क्यों कीं?
A) मराठों और पिंडारियों के लगातार हमलों और लूटमार से सुरक्षा प्राप्त करने के लिए | B) कंपनी से व्यापार बढ़ाने के लिए | C) मुगलों को हराने के लिए | D) अपने जागीरदारों को खुश करने के लिए -
राजस्थान में 1950 में संविधान लागू होने से सबसे बड़ी राजनीतिक प्राप्ति क्या हुई?
A) राजशाही की वापसी | B) रियासती शासनों का अंत और 1 समान लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की स्थापना | C) अंग्रेजों का शासन और मजबूत हुआ | D) सभी रियासतें अलग देश बन गईं -
कथन: जागीरदार को राजा द्वारा हटाया भी जा सकता था।
निष्कर्ष 1: यदि जागीरदार राजा के आदेशों का उल्लंघन करे या राजद्रोह करे, तो उसकी जागीर जब्त की जा सकती थी।
निष्कर्ष 2: जागीरदार का पद 100 प्रतिशत सुरक्षित था और कोई उसे हटा नहीं सकता था।
A) केवल निष्कर्ष 1 सही है | B) केवल निष्कर्ष 2 सही है | C) निष्कर्ष 1 और 2 दोनों सही हैं | D) न तो 1 और न ही 2 सही है
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