11. बाज़ार दर्शन (Bazaar Darshan)
इस पेज पर आपको 11. बाज़ार दर्शन (Bazaar Darshan) के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), परीक्षा उपयोगी नोट्स और ऑनलाइन क्विज़ मिलेंगे। अपने ज्ञान का परीक्षण करने और बोर्ड/प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मॉक टेस्ट में अवश्य भाग लें।
👉 अध्याय का सारांश (Summary)
प्रिय विद्यार्थियों, कक्षा 12 अनिवार्य हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'आरोह भाग 2' के इस अध्याय 11 में हम हिंदी गद्य साहित्य के प्रसिद्ध विचारक और मनोवैज्ञानिक कथाकार जैनेंद्र कुमार जी के अत्यंत प्रभावशाली निबंध 'बाज़ार दर्शन' का सविस्तार अध्ययन करेंगे। यह अध्याय आपकी आगामी NCERT और RBSE बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पाठ में लेखक ने बाज़ार के चकाचौंध भरे रूप, उपभोगवादी संस्कृति (Consumerism) और हमारी खरीददारी की आदतों के पीछे छिपे मनोविज्ञान का बहुत ही सूक्ष्म विश्लेषण किया है।
लेखक का मानना है कि बाज़ार हमें अपनी ओर आकर्षित करने के लिए हमेशा सजा-धजा रहता है, लेकिन बाज़ार का असली जादू तभी चलता है जब हम अपनी आवश्यकताओं को नहीं जानते। यदि हम बिना किसी तय लक्ष्य या जरूरत के बाज़ार जाते हैं, तो बाज़ार की चकाचौंध हमें अपना गुलाम बना लेती है। हम विज्ञापनों और बाज़ार की दिखावटी चमक-धमक में फंसकर ऐसी चीजें भी खरीद लाते हैं जिनकी हमें रत्ती भर भी आवश्यकता नहीं होती। इसे आप अपने आसपास के किसी मॉल या बड़ी दुकान के सेल (Sale) के दौरान होने वाली भीड़ से जोड़कर देख सकते हैं, जहाँ लोग केवल सस्ता होने के लालच में अनावश्यक सामान खरीद लेते हैं। लेखक ने इसे 'परचेजिंग पावर' (Purchasing Power) का अहंकार कहा है। जो लोग बाज़ार को अपना गुलाम बनाकर चलते हैं, वे जानते हैं कि उन्हें क्या चाहिए, लेकिन जो लोग बाज़ार की चकाचौंध के गुलाम बन जाते हैं, वे अंततः अपनी जेब और मन दोनों को खाली कर लेते हैं।
पाठ में लेखक ने 'भगत जी' का 1 बहुत ही सुंदर और प्रेरक उदाहरण दिया है। भगत जी एक साधारण चूर्ण बेचने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन वे बाज़ार के जादू से पूरी तरह मुक्त हैं। वे रोज़ एक निश्चित मात्रा में चूर्ण बेचते हैं और जैसे ही उनकी कमाई पूरी हो जाती है, वे शेष चूर्ण बच्चों में मुफ़्त बाँट देते हैं। उनके मन में न तो धन का लालच है और न ही बाज़ार की चकाचौंध के प्रति कोई आकर्षण। वे बाज़ार से तभी गुजरते हैं जब उन्हें अपनी ज़रूरत का कुछ सामान लेना होता है। लेखक ने उन्हें 'बाज़ार का असली हितैषी' कहा है, क्योंकि वे बाज़ार को केवल वही देते हैं जो उसकी उपयोगिता है और बाज़ार से वही लेते हैं जिसकी उन्हें ज़रूरत है। वे न तो बाज़ार को बेकार मानते हैं और न ही उपभोग के विरोध में हैं, वे बस एक मर्यादित और संतुष्ट जीवन जीने में विश्वास रखते हैं।
यह निबंध हमें यह सिखाता है कि बाज़ार का उद्देश्य हमारी जरूरतों को पूरा करना है, न कि हमें अपनी इच्छाओं के जाल में उलझाना। आज के दौर में जब हर तरफ दिखावे और ब्रांड का बोलबाला है, यह पाठ हमें अपनी सोच को नियंत्रित करने और अनावश्यक उपभोग से बचने की प्रेरणा देता है। बाज़ार का उपयोग संयम के साथ करना ही सच्ची बुद्धिमानी है।
विशेषता: यह एक 3-Level आधारित यूनीक क्विज़ है। अगले स्तर (Level 2 और 3) को अनलॉक करने के लिए छात्रों को वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक स्कोर करने होंगे, जो उनकी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को 100% मजबूत बनाता है।
अध्याय के सभी प्रश्न (Revision Notes)
*नोट: यह सेक्शन रिवीजन के लिए है। अपना ज्ञान परखने के लिए ऊपर दिए गए क्विज़ में भाग लें।
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'बाज़ार दर्शन' निबंध के लेखक कौन हैं?
A) फणीश्वरनाथ रेणु | B) जैनेंद्र कुमार | C) हजारी प्रसाद द्विवेदी | D) अज्ञेय -
बाज़ार का जादू किस पर सबसे अधिक चलता है?
A) जिसका मन भरा हो | B) जिसका मन खाली हो | C) जो ज्ञानी हो | D) जो भिखारी हो -
लेखक के अनुसार बाज़ार किस रूप में सजा रहता है?
A) अंधेरे के रूप में | B) आमंत्रण के रूप में | C) खतरे के रूप में | D) पुराने रूप में -
लेखक का मित्र बाज़ार से क्या लेकर लौटा?
A) कुछ नहीं | B) बहुत सारे बंडल (अनावश्यक सामान) | C) केवल 1 पेन | D) केवल फल -
लेखक के मित्र ने अपनी खरीददारी का दोष किस पर मढ़ा?
A) दुकानदार पर | B) अपनी पत्नी पर | C) बाज़ार पर | D) अपनी गरीबी पर -
बाज़ार में 'परचेजिंग पावर' का अर्थ क्या है?
A) बाज़ार घूमने की शक्ति | B) पैसे से सामान खरीदने की शक्ति | C) उधार लेने की शक्ति | D) सामान बेचना -
भगत जी क्या काम करते थे?
A) वकालत | B) चूर्ण बेचने का | C) सब्जी बेचने का | D) खेती -
भगत जी प्रतिदिन कितने आने की कमाई करते थे?
A) 4 आने | B) 8 आने | C) 10 आने | D) 12 आने -
भगत जी बची हुई चूर्ण का क्या करते थे?
A) घर ले जाते थे | B) बच्चों को मुफ़्त बाँट देते थे | C) फेंक देते थे | D) दुकानदार को दे देते थे -
लेखक ने बाज़ार की तुलना किससे की है?
A) नर्क से | B) शैतान के जाल से | C) एक आकर्षण से | D) जंगल से -
भगत जी पर किसका जादू नहीं चलता था?
A) दुकानदार का | B) बाज़ार की चकाचौंध का | C) पैसे का | D) दोस्तों का -
लेखक के अनुसार मनुष्य को बाज़ार कब जाना चाहिए?
A) जब मन खाली हो | B) जब मन भरा हो और ज़रूरत स्पष्ट हो | C) रात के समय | D) केवल संडे को -
बाज़ार का उपयोग किसे करना चाहिए?
A) जो अमीर हो | B) जो ज़रूरतमंद हो और संयमी हो | C) जो भिखारी हो | D) सबको -
भगत जी बाज़ार से क्या खरीदते थे?
A) कपड़े | B) केवल ज़रूरी वस्तुएं जैसे काला नमक और जीरा | C) मिठाई | D) खिलौने -
लेखक के अनुसार बाज़ार का असली लाभ क्या है?
A) दिखावा करना | B) ज़रूरतमंद को लाभ पहुँचाना और आवश्यकताओं की पूर्ति करना | C) पैसा बर्बाद करना | D) लुटना -
लेखक के मित्र द्वारा सामान खरीदने का क्या कारण था?
A) ज़रूरत | B) पत्नी की इच्छा (फैशन) | C) दोस्तों का दबाव | D) मजबूरी -
लेखक के अनुसार बाज़ार का जादू कब उतरता है?
A) सोने पर | B) ज़रूरत समझ में आने पर | C) पैसे खत्म होने पर | D) दुकान बंद होने पर -
संयमी व्यक्ति बाज़ार को कैसा मानता है?
A) बेकार | B) जरूरत का साधन | C) मुनाफे की जगह | D) लुटेरा -
भगत जी के जीवन का कौन सा गुण लेखक को सबसे अधिक प्रभावित करता है?
A) उनकी अमीरी | B) उनका संयम और संतोष | C) उनका पहनावा | D) उनकी बोली -
लेखक का 'बाज़ार दर्शन' पाठ हमें क्या सिखाता है?
A) बचत करना | B) उपभोग पर संयम रखना और ज़रूरत को पहचानना | C) खूब सामान खरीदना | D) बाज़ार न जाना -
भगत जी चूर्ण में कौन सा नमक मिलाते थे?
A) सफेद | B) काला | C) सेंधा | D) नहीं मिलाते थे -
'मन खाली होना' का तात्पर्य क्या है?
A) मन में कोई विचार न होना | B) मन में असंतोष और स्पष्ट लक्ष्य का अभाव होना | C) भूख लगना | D) नींद आना -
'बाज़ार दर्शन' निबंध मुख्य रूप से किस शैली में लिखा गया है?
A) व्यंग्यात्मक और विचारात्मक | B) आत्मकथात्मक | C) ऐतिहासिक | D) वर्णात्मक -
लेखक ने किन लोगों को बाज़ार का 'बाजारूपन' बढ़ाने वाला कहा है?
A) जो केवल ज़रूरत का सामान खरीदते हैं | B) जो अपनी 'परचेजिंग पावर' का प्रदर्शन करते हैं | C) भिखारियों को | D) बच्चों को -
'बाज़ारूपन' से क्या अभिप्राय है?
A) बाज़ार की रौनक | B) छल-कपट, दिखावा और आवश्यकता से अधिक उपभोग को बढ़ावा | C) सस्ता माल | D) दुकानें -
भगत जी चूर्ण बेचना कब बंद कर देते थे?
A) शाम को | B) 6 आने की कमाई होते ही | C) ग्राहक खत्म होने पर | D) अगले दिन -
भगत जी के लिए पैसा क्या है?
A) जीवन का एकमात्र लक्ष्य | B) एक तुच्छ वस्तु (जिसका कोई आकर्षण नहीं) | C) पूजा की सामग्री | D) भोजन का साधन -
लेखक ने 'मनी बैग' किसे कहा है?
A) भगत जी को | B) अपने मित्र को | C) पैसे के अहंकार को | D) दुकानदार को -
'बाज़ार दर्शन' में लेखक ने 'अंधभक्ति' का प्रयोग किसके लिए किया है?
A) ईश्वर की भक्ति | B) बाज़ार की अंधी दौड़ में शामिल होने वाले लोगों के लिए | C) भगत जी के लिए | D) लेखक के लिए -
भगत जी को बाज़ार में देखकर लोग क्या कहते थे?
A) चूर्ण वाला | B) भगत जी | C) अमीर आदमी | D) पागल -
जैनेंद्र कुमार की 'बाज़ार दर्शन' में किस प्रकार की दार्शनिक सोच का प्रभाव है?
A) मार्क्सवाद | B) गांधीवादी आर्थिक दर्शन और संयमित जीवन | C) पूंजीवाद | D) अस्तित्ववाद -
'बाज़ार का जादू चढ़ना' मनोविज्ञान की किस प्रवृत्ति को इंगित करता है?
A) लालच | B) उपभोक्तावाद के सम्मोहन और अविवेकपूर्ण खर्च की प्रवृत्ति | C) बचत करने की आदत | D) ईमानदारी -
'परचेजिंग पावर' का प्रदर्शन किस प्रकार के समाज का लक्षण है?
A) संतोषी समाज | B) दिखावा-प्रिय, असुरक्षित और उपभोक्तावादी समाज | C) सादा जीवन वाला समाज | D) परिश्रमी समाज -
भगत जी का 'संतोष' उनके व्यक्तित्व का कौन सा पक्ष उजागर करता है?
A) उनका डर | B) उनकी दार्शनिक परिपक्वता और मोह-माया से मुक्ति | C) उनकी कायरता | D) उनकी गरीबी -
लेखक बाज़ार को 'सार्थकता' (Meaningfulness) देने वाला किसे मानता है?
A) अमीर ग्राहक को | B) जो अपनी ज़रूरत जानता है और संयमित है | C) दुकानदार को | D) सरकार को -
'बाज़ार का बाज़ारूपन' का अर्थ क्या है?
A) बाज़ार में बहुत भीड़ होना | B) बाज़ार का छल-कपट और विज्ञापनों द्वारा इच्छाओं को उकसाना | C) बाज़ार में सफाई होना | D) बाज़ार में सामान होना -
जैनेंद्र जी ने 'बाज़ार दर्शन' में किस प्रकार की आर्थिक विसंगति की ओर संकेत किया है?
A) बेरोजगारी | B) धन के प्रदर्शन की होड़ और ज़रूरत बनाम चाहत का द्वंद्व | C) महंगाई | D) टैक्स -
भगत जी चूर्ण बेचने में अपना मुनाफा क्यों नहीं बढ़ाते थे?
A) क्योंकि वे डरपोक थे | B) क्योंकि उनका जीवन एक निश्चित और संतोषजनक दायरे में बंधा था | C) क्योंकि उन्हें डर था | D) क्योंकि सरकार ने मना किया था -
'बाज़ार दर्शन' का संदेश आधुनिक दौर में क्या है?
A) बाज़ार बंद करो | B) अपने मन पर नियंत्रण रखो और बाज़ार का उपयोग विवेक से करो | C) ऑनलाइन सामान खरीदो | D) सब कुछ मुफ़्त लो -
लेखक ने 'पैसे की व्यंग्य शक्ति' का प्रयोग किस संदर्भ में किया है?
A) धन के अहंकार के माध्यम से दूसरों को नीचा दिखाना | B) ईमानदारी के लिए | C) भगत जी के लिए | D) सबको दुखी करने के लिए -
भगत जी का व्यक्तित्व लेखक को किस प्रकार के 'अर्थशास्त्र' का दर्शन कराता है?
A) अंधाधुंध उपभोग का | B) संतोष, सादगी और मानवीय सेवा का अर्थशास्त्र | C) पूंजीवादी अर्थशास्त्र | D) सरकारी अर्थशास्त्र -
'बाज़ार' और 'मनुष्यता' के बीच का संतुलन क्या है?
A) बाज़ार बड़ा है | B) मनुष्य की जरूरतों के लिए बाज़ार का संयमित उपयोग करना | C) मनुष्य बड़ा है | D) दुकानें बड़ी हैं -
लेखक 'भगत जी' को बाज़ार का क्या मानते हैं?
A) ग्राहक | B) हितैषी | C) दुश्मन | D) दुकानदार -
जैनेंद्र कुमार की रचनाओं में मुख्य रूप से क्या झलकता है?
A) मानवीय मनोविज्ञान की गहरी पड़ताल | B) समाज के प्रति उपेक्षा | C) राजनीतिक भाषण | D) ऐतिहासिक तथ्य -
'बाज़ार दर्शन' पाठ का अंत क्या संकेत देता है?
A) सच्चा अर्थशास्त्र वही है जो संयम सिखाए | B) बाज़ार बंद कर देना चाहिए | C) पैसे ही सब कुछ हैं | D) अमीर बनो
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