8. मुद्रा और बैंकिंग (Money and Banking)
इस पेज पर आपको 8. मुद्रा और बैंकिंग (Money and Banking) के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ), परीक्षा उपयोगी नोट्स और ऑनलाइन क्विज़ मिलेंगे। अपने ज्ञान का परीक्षण करने और बोर्ड/प्रतियोगी परीक्षा में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए मॉक टेस्ट में अवश्य भाग लें।
👉 अध्याय का सारांश (Summary)
प्रिय विद्यार्थियों, इस अध्याय में हम समष्टि अर्थशास्त्र के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों 'मुद्रा' और 'बैंकिंग प्रणाली' का गहराई से अध्ययन करेंगे। आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा एक ऐसी धुरी है जिसके इर्द-गिर्द सभी आर्थिक गतिविधियाँ घूमती हैं। मुद्रा के आविष्कार से पहले 'वस्तु विनिमय प्रणाली' प्रचलित थी, जहाँ वस्तुओं का विनिमय सीधे वस्तुओं से होता था। इस प्रणाली में 'आवश्यकताओं के दोहरे संयोग' की एक गंभीर समस्या थी, जिसका अर्थ यह है कि दो व्यक्तियों के पास एक-दूसरे की आवश्यकता की वस्तुएं होना अनिवार्य था, जो बहुत कठिन था। इसके अतिरिक्त, मूल्य के एक साझे मापक का अभाव और धन को संचित करने में कठिनाई जैसी कमियां भी थीं। मुद्रा ने इन सभी समस्याओं को हल कर दिया। मुद्रा को एक ऐसी वस्तु के रूप में परिभाषित किया जाता है जो विनिमय के माध्यम, मूल्य के मापक, मूल्य के संचय और आस्थगित भुगतानों के मान के रूप में सामान्यतः स्वीकार की जाती है।
अध्याय का दूसरा और सबसे व्यावहारिक भाग बैंकिंग प्रणाली से संबंधित है। बैंक दो प्रकार के होते हैं: व्यापारिक बैंक और केंद्रीय बैंक। व्यापारिक बैंक (जैसे भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक) वे वित्तीय संस्थाएँ हैं जो लाभ कमाने के उद्देश्य से जनता से जमा स्वीकार करती हैं और उन्हें ऋण प्रदान करती हैं। व्यापारिक बैंकों का सबसे महत्वपूर्ण कार्य 'साख निर्माण' या साख सृजन करना है। बैंक अपनी प्राथमिक जमाओं के आधार पर कई गुना अधिक ऋण देकर अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति को बढ़ाते हैं। साख निर्माण की यह क्षमता 'कानूनी आरक्षित अनुपात' पर निर्भर करती है, जिसके अंतर्गत बैंक अपनी कुल जमा का एक निश्चित हिस्सा नकद रूप में रखने को कानूनी रूप से विवश होते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भारत का 'केंद्रीय बैंक' है, जो देश की समूची बैंकिंग और मौद्रिक व्यवस्था का शीर्ष नियामक है। केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्य हैं—नोट जारी करने का एकाधिकार, सरकार का बैंकर, एजेंट और सलाहकार, तथा बैंकों का बैंक। केंद्रीय बैंक का सबसे महत्वपूर्ण समष्टिगत कार्य 'साख नियंत्रण' (मुद्रा की पूर्ति को नियंत्रित करना) है। इसके लिए वह मौद्रिक नीति के दो प्रकार के उपकरणों का उपयोग करता है: मात्रात्मक और गुणात्मक। मात्रात्मक उपकरणों में बैंक दर, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, नकद आरक्षित अनुपात (CRR), वैधानिक तरलता अनुपात (SLR), और खुले बाजार की क्रियाएं शामिल हैं। गुणात्मक उपकरणों में सीमांत आवश्यकता का निर्धारण और नैतिक दबाव प्रमुख हैं। मंदी के समय केंद्रीय बैंक दरों को घटाकर साख का विस्तार करता है, जबकि मुद्रास्फीति (महंगाई) के समय दरों को बढ़ाकर साख को सिकोड़ता है। यह अध्याय देश की मौद्रिक रीढ़ को समझने का सबसे सटीक जरिया है।
विशेषता: यह एक 3-Level आधारित यूनीक क्विज़ है। अगले स्तर को अनलॉक करने के लिए छात्रों को वर्तमान स्तर में कम से कम 70% अंक स्कोर करने होंगे, जो आपकी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को 100% मजबूत बनाता है।
अध्याय के सभी प्रश्न (Revision Notes)
*नोट: यह सेक्शन रिवीजन के लिए है। अपना ज्ञान परखने के लिए ऊपर दिए गए क्विज़ में भाग लें।
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वस्तु से वस्तु के सीधे विनिमय की प्रणाली को क्या कहा जाता है?
A) मौद्रिक प्रणाली | B) वस्तु विनिमय प्रणाली | C) क्रेडिट प्रणाली | D) बैंकिंग प्रणाली -
वस्तु विनिमय प्रणाली की सबसे मुख्य और गंभीर कठिनाई कौन सी थी?
A) पैसों की अधिकता | B) आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव | C) बैंकों का न होना | D) कर की ऊँची दर -
मुद्रा का सबसे प्राथमिक और महत्वपूर्ण कार्य कौन सा माना जाता है?
A) मूल्य का संचय | B) विनिमय का माध्यम | C) आस्थगित भुगतान का मान | D) पूंजी का निर्माण -
भारत का केंद्रीय बैंक कौन सा है जो मौद्रिक व्यवस्था को नियंत्रित करता है?
A) भारतीय स्टेट बैंक | B) भारतीय रिजर्व बैंक | C) पंजाब नेशनल बैंक | D) बैंक ऑफ बड़ौदा -
जनता से जमा स्वीकार करना और उन्हें ऋण देना किस बैंक का मुख्य कार्य है?
A) केंद्रीय बैंक | B) व्यापारिक बैंक | C) भूमि विकास बैंक | D) विश्व बैंक -
भारत में एक रुपए का नोट और सभी छोटे सिक्के किसके द्वारा जारी किए जाते हैं?
A) भारतीय रिजर्व बैंक | B) भारत सरकार का वित्त मंत्रालय | C) स्टेट बैंक | D) नीति आयोग -
व्यापारिक बैंकों द्वारा अपनी प्राथमिक जमा के आधार पर ऋण देने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
A) नोट निर्गमन | B) साख निर्माण | C) विदेशी विनिमय | D) राजकोषीय नीति -
केंद्रीय बैंक द्वारा अन्य व्यापारिक बैंकों को दिए जाने वाले ऋण पर ली जाने वाली दीर्घकालीन ब्याज दर क्या कहलाती है?
A) रेपो दर | B) बैंक दर | C) रिवर्स रेपो दर | D) नकद दर -
मुद्रा की पूर्ति के किस माप को सबसे अधिक तरल मुद्रा माना जाता है?
A) एम एक | B) एम दो | C) एम तीन | D) एम चार -
केंद्रीय बैंक का नोट जारी करने के संदर्भ में कैसा अधिकार होता है?
A) सीमित अधिकार | B) पूर्ण एकाधिकार | C) कोई अधिकार नहीं | D) साझा अधिकार -
व्यापारिक बैंकों को अपनी कुल जमा का जो निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास नकद रखना पड़ता है उसे क्या कहते हैं?
A) वैधानिक तरलता अनुपात | B) नकद आरक्षित अनुपात | C) बैंक अनुपात | D) रेपो अनुपात -
मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करे यह परिभाषा किस अर्थशास्त्री ने दी थी?
A) मार्शल | B) वाकर | C) कीन्स | D) क्राउथर -
भविष्य में किए जाने वाले भुगतानों को मुद्रा के किस कार्य के अंतर्गत रखा जाता है?
A) विनिमय का माध्यम | B) मूल्य का मापक | C) आस्थगित भुगतानों का मान | D) मूल्य का संचय -
व्यापारिक बैंकों को अपनी कुल परिसंपत्तियों का जो हिस्सा तरल रूप में अपने पास रखना होता है उसे क्या कहते हैं?
A) नकद आरक्षित अनुपात | B) वैधानिक तरलता अनुपात | C) रिवर्स रेपो दर | D) जमा अनुपात -
बैंकों के बैंक और अंतिम ऋणदाता के रूप में कौन सी संस्था कार्य करती है?
A) भारतीय स्टेट बैंक | B) केंद्रीय बैंक | C) वित्त मंत्रालय | D) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष -
केंद्रीय बैंक द्वारा साख की कुल मात्रा को नियंत्रित करने वाले उपायों को क्या कहा जाता है?
A) गुणात्मक उपाय | B) मात्रात्मक उपाय | C) राजकोषीय उपाय | D) बजट उपाय -
जब केंद्रीय बैंक व्यापारिक बैंकों से अल्पकालीन ऋण लेता है तो उस दर को क्या कहते हैं?
A) रेपो दर | B) रिवर्स रेपो दर | C) बैंक दर | D) ब्याज दर -
मुद्रा की पूर्ति के किस माप को व्यापक मुद्रा की संज्ञा दी जाती है?
A) एम एक | B) एम दो | C) एम तीन | D) एम चार -
सरकार के बैंकर, एजेंट और वित्तीय सलाहकार के रूप में कौन कार्य करता है?
A) स्टेट बैंक | B) केंद्रीय बैंक | C) योजना आयोग | D) संसद -
बैंक में जमा वह राशि जिसे जमाकर्ता जब चाहे निकाल सकता है क्या कहलाती है?
A) सावधि जमा | B) मांग जमा | C) स्थायी जमा | D) आरक्षित जमा -
आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का क्या अर्थ होता है जो वस्तु विनिमय की शर्त थी?
A) दो वस्तुओं का एक जैसा होना | B) एक व्यक्ति की बेचने की इच्छा और दूसरे की खरीदने की इच्छा का आपस में पूरी तरह मेल खाना | C) दो व्यक्तियों का अमीर होना | D) बाजार में बहुत सामान होना -
व्यापारिक बैंकों का साख गुणांक मुख्य रूप से किस पर निर्भर करता है?
A) बैंक के कर्मचारियों पर | B) कानूनी आरक्षित अनुपात के मूल्य पर | C) सरकार के बजट पर | D) सोने के भंडार पर -
यदि कानूनी आरक्षित अनुपात का मूल्य बीस प्रतिशत है तो साख गुणांक का मान कितना होगा?
A) दो | B) चार | C) पांच | D) दस -
देश की अर्थव्यवस्था में मुद्रा की कुल पूर्ति का क्या अर्थ होता है?
A) एक निश्चित समय बिंदु पर जनता के पास उपलब्ध कुल मुद्रा की मात्रा | B) एक वर्ष में छपने वाले कुल नोट | C) बैंकों में रखा सारा सोना | D) सरकार का कुल राजस्व -
केंद्रीय बैंक द्वारा खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों को बेचने पर साख की मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A) साख का विस्तार होता है | B) साख का संकुचन होता है अर्थात साख घटती है | C) कोई प्रभाव नहीं पड़ता | D) ब्याज दर गिर जाती है -
मुद्रास्फीति या महंगाई के समय केंद्रीय बैंक को अपनी मौद्रिक नीति के दरों में क्या बदलाव करना चाहिए?
A) दरों को घटाना चाहिए | B) दरों को बढ़ाना चाहिए ताकि साख महंगी हो सके | C) दरों को स्थिर रखना चाहिए | D) सभी दरें शून्य कर देनी चाहिए -
रिवर्स रेपो दर में वृद्धि करने पर व्यापारिक बैंकों की ऋण देने की क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A) क्षमता बढ़ जाती है | B) क्षमता घट जाती है क्योंकि वे रिजर्व बैंक में पैसा रखना पसंद करते हैं | C) क्षमता स्थिर रहती है | D) ऋण मुफ्त हो जाता है -
केंद्रीय बैंक द्वारा साख नियंत्रण के लिए अपनाए जाने वाले गुणात्मक उपायों का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
A) कुल साख की मात्रा बदलना | B) साख के उपयोग की दिशा और विशिष्ट क्षेत्रों में ऋण के प्रवाह को नियंत्रित करना | C) बैंकों को बंद करना | D) नोटों की छपाई रोकना -
बैंक दर और रेपो दर में क्या मुख्य तकनीकी अंतर होता है?
A) दोनों एक ही हैं | B) बैंक दर दीर्घकालीन ऋण के लिए है जबकि रेपो दर अल्पकालीन ऋण के लिए होती है | C) बैंक दर सस्ती होती है | D) रेपो दर केवल सरकार के लिए है -
उच्च शक्ति प्राप्त मुद्रा के अंतर्गत किन चीजों को शामिल किया जाता है?
A) केवल सिक्कों को | B) जनता के पास करेंसी और बैंकों के पास उपलब्ध कुल आरक्षित नकद राशि | C) केवल मांग जमा | D) विदेशी मुद्रा का भंडार -
साख निर्माण की प्रक्रिया में व्युत्पन्न जमाएँ किन्हें कहा जाता है?
A) जनता द्वारा नकद जमा की गई राशि | B) बैंक द्वारा ऋण देते समय ऋणी के खाते में जमा की गई कागजी राशि | C) विदेशी बैंकों से प्राप्त धन | D) सरकार की सब्सिडी -
केंद्रीय बैंक को अंतिम ऋणदाता क्यों कहा जाता है?
A) क्योंकि वह सबसे बड़ा है | B) जब व्यापारिक बैंकों को कहीं से भी वित्तीय सहायता नहीं मिलती तब केंद्रीय बैंक उनकी मदद करता है | C) क्योंकि वह सरकार को कर्ज देता है | D) क्योंकि वह सबसे अंत में बना था -
मुद्रा के मूल्य के संचय के कार्य ने पूंजी निर्माण को कैसे आसान बना दिया?
A) अनाज सड़ने से बच गया | B) लोग धन को भविष्य के लिए बिना नष्ट हुए आसानी से बचाकर निवेश करने लगे | C) बैंकों ने ब्याज देना बंद किया | D) मुद्रा का आकार छोटा हो गया -
मौद्रिक नीति के अंतर्गत सीमांत आवश्यकता का निर्धारण करना किस प्रकार का उपाय है?
A) मात्रात्मक उपाय | B) गुणात्मक अथवा चयनात्मक उपाय | C) राजकोषीय उपाय | D) बजट उपाय -
अर्थव्यवस्था में मंदी या बेरोजगारी की स्थिति को दूर करने के लिए केंद्रीय बैंक को क्या करना चाहिए?
A) नकद आरक्षित अनुपात को बढ़ाना चाहिए | B) बैंक दर और आरक्षित अनुपातों को घटाकर साख का विस्तार करना चाहिए | C) प्रतिभूतियां बेचनी चाहिए | D) ब्याज दरें और ऊँची करनी चाहिए -
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) के अंतर्गत बैंक अपने पास किस रूप में संपत्ति रख सकते हैं?
A) केवल नकद | B) नकद, सोना और स्वीकृत सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में | C) केवल विदेशी मुद्रा | D) जमीन के कागजात -
मुद्रा की पूर्ति के माप एम तीन में एम एक के अलावा किस अन्य राशि को जोड़ा जाता है?
A) डाकघर की बचत जमा | B) व्यापारिक बैंकों के पास सावधि या मियादी जमा राशि | C) विदेशी ऋण | D) सरकार का कुल सोना -
केंद्रीय बैंक द्वारा किए जाने वाले 'नैतिक दबाव' का क्या अर्थ होता है?
A) कानूनी जेल भेजना | B) सलाह, अनुरोध और दिशा-निर्देशों के माध्यम से बैंकों को अपनी नीतियों के अनुकूल काम करने के लिए मनाना | C) बैंकों पर भारी जुर्माना लगाना | D) बैंकों का लाइसेंस रद्द करना -
मुद्रा विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करके किस बड़ी लागत को समाप्त कर देती है?
A) उत्पादन लागत को | B) लेन-देन की कठिनाइयों और खोज की भारी समय लागत को | C) परिवहन लागत को | D) कर की लागत को -
फिएट मनी यादिष्ट मुद्रा किसे कहा जाता है जो वर्तमान में चलन में है?
A) सोने के सिक्कों को | B) वह मुद्रा जो सरकार के आदेश और कानून के आधार पर सामान्य रूप से स्वीकार की जाती है | C) विदेशी चेक को | D) प्लास्टिक कार्ड को -
यदि किसी देश का केंद्रीय बैंक नकद आरक्षित अनुपात को अचानक बहुत अधिक बढ़ा देता है तो देश के आर्थिक तंत्र पर इसका क्या दूरगामी प्रभाव पड़ेगा?
A) मुद्रा की पूर्ति बढ़ जाएगी | B) व्यापारिक बैंकों के पास ऋण देने योग्य कोष कम हो जाएंगे जिससे निवेश और मांग घटेगी तथा महंगाई नियंत्रित होगी | C) बैंक बहुत अमीर हो जाएंगे | D) ब्याज की दरें गिर जाएंगी -
वस्तु विनिमय प्रणाली में 'मूल्य के एक साझे मापक का अभाव' यह समस्या लेखांकन को कैसे असंभव बना देती थी?
A) क्योंकि लोग अनपढ़ थे | B) सभी वस्तुओं का मूल्य एक साझी इकाई में व्यक्त न होने के कारण परस्पर विनिमय अनुपात तय करना अत्यंत जटिल था | C) क्योंकि वस्तुएं छोटी थीं | D) क्योंकि बाजार में दुकानें नहीं थीं -
व्यापारिक बैंकों द्वारा किया जाने वाला साख निर्माण असीमित क्यों नहीं हो सकता इसके पीछे क्या मुख्य कानूनी और व्यावहारिक विवशता है?
A) जनता ऋण नहीं चाहती | B) यह प्राथमिक नकद जमा की मात्रा और रिजर्व बैंक द्वारा तय कानूनी आरक्षित अनुपात की न्यूनतम सीमा से बंधा होता है | C) बैंकों के पास दफ्तर छोटे हैं | D) सरकार ऋण देने पर जुर्माना लगाती है -
मुद्रा की पूर्ति के मापों में 'एम एक' को सबसे संकीर्ण और तरल तथा 'एम तीन' को व्यापक मुद्रा क्यों माना जाता है इसका समष्टिगत आधार क्या है?
A) एम एक में सोना होता है | B) एम एक में तुरंत खर्च होने वाली मांग जमा शामिल है जबकि एम तीन में समयबद्ध सावधि जमा शामिल होती है जो तुरंत खर्च नहीं हो सकती | C) एम तीन विदेशी मुद्रा है | D) दोनों में कोई अंतर नहीं है -
खुले बाजार की क्रियाओं के अंतर्गत जब केंद्रीय बैंक व्यावसायिक बैंकों से भारी मात्रा में प्रतिभूतियां 'खरीदता' है तो बैंकिंग तरलता पर क्या असर होता है?
A) बैंकिंग तरलता घट जाती है | B) व्यापारिक बैंकों के पास नकद कोष बढ़ जाते हैं जिससे उनकी साख सृजन की क्षमता का विस्तार होता है | C) बैंक दिवालिया हो जाते हैं | D) ब्याज दर बढ़ जाती है -
मौद्रिक नीति के मात्रात्मक और गुणात्मक उपकरणों में मूल और रणनीतिक अंतर क्या माना जाता है?
A) मात्रात्मक उपकरण सस्ते होते हैं | B) मात्रात्मक उपकरण समूची अर्थव्यवस्था में कुल साख की मात्रा को प्रभावित करते हैं जबकि गुणात्मक उपकरण विशिष्ट क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं | C) गुणात्मक उपकरण केवल सरकारी बैंकों के लिए हैं | D) दोनों का प्रभाव बिल्कुल एक समान होता है -
मुद्रास्फीतिजनित दबावों को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक को रेपो दर में वृद्धि क्यों करनी पड़ती है इसके पीछे क्या आर्थिक गतिकी है?
A) ताकि रिजर्व बैंक का लाभ बढ़े | B) रेपो दर बढ़ने से व्यापारिक बैंकों के लिए कर्ज महंगा होता है जिससे वे जनता के लिए ब्याज दरें बढ़ाते हैं और मांग कम होती है | C) इससे नोटों की छपाई सस्ती होती है | D) इससे विदेशी निवेश बढ़ता है -
उच्च शक्ति प्राप्त मुद्रा (एच) और सामान्य मुद्रा की पूर्ति (एम) में क्या गहरा संरचनात्मक संबंध होता है जो अर्थव्यवस्था को गति देता है?
A) दोनों बिल्कुल बराबर होती हैं | B) उच्च शक्ति प्राप्त मुद्रा साख निर्माण का आधार बनती है और मुद्रा की कुल पूर्ति इसका कई गुना गुणांक होती है | C) सामान्य मुद्रा बड़ी होती है | D) उच्च शक्ति प्राप्त मुद्रा केवल विदेशों में होती है -
यदि व्यापारिक बैंक अपनी साख निर्माण की प्रक्रिया के दौरान समाज में बहुत अधिक कागजी मुद्रा या ऋण सृजित कर दें तो इसका देश की आंतरिक संप्रभुता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A) देश अमीर हो जाएगा | B) वस्तुओं की तुलना में मुद्रा की पूर्ति अत्यधिक बढ़ने से भयंकर महंगाई या मुद्रास्फीति का संकट खड़ा हो जाएगा | C) विदेशी व्यापार रुक जाएगा | D) सभी नागरिक सरकारी कर्मचारी बन जाएंगे -
गुणात्मक उपकरण के रूप में 'ऋण की राशनिंग' करने का केंद्रीय बैंक का क्या मुख्य और न्यायपूर्ण सामाजिक उद्देश्य होता है?
A) बैंकों को घाटा पहुँचाना | B) सट्टा गतिविधियों या गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में साख के प्रवाह को रोककर उसे कृषि और लघु उद्योगों की ओर मोड़ना | C) सभी ऋणों को पूरी तरह बंद करना | D) केवल विदेशी कंपनियों को कर्ज देना -
मांग जमा को नकद मुद्रा के बिल्कुल समान तरल और वैध क्यों माना जाता है आधुनिक विनिमय व्यवस्था में?
A) क्योंकि इस पर ब्याज मिलता है | B) चूंकि इन्हें चेक, डेबिट कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से बिना किसी देरी के किसी भी समय भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है | C) क्योंकि यह सरकारी तिजोरी में रहती है | D) क्योंकि इसका रंग नोट जैसा होता है -
साख नियंत्रण के साधन के रूप में 'सीमांत आवश्यकता' में वृद्धि करने से ऋणी की कर्ज लेने की क्षमता कैसे कम हो जाती है?
A) बैंक ऋणी को जेल भेज देता है | B) गिरवी रखी जाने वाली संपत्ति के मूल्य की तुलना में मिलने वाले ऋण की स्वीकृत राशि का अनुपात कम हो जाता है | C) ऋणी को अधिक कर देना पड़ता है | D) संपत्ति का मूल्य शून्य हो जाता है -
जब देश की अर्थव्यवस्था मंदी और कम मांग के जाल में फंसी हो तो रिजर्व बैंक को वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) में कटौती क्यों करनी चाहिए?
A) ताकि सरकार का खर्च कम हो | B) SLR घटने से बैंकों को अपने पास कम संपत्ति ब्लॉक रखनी पड़ती है जिससे बाजार में ऋण का प्रवाह बढ़ता है और मांग जागृत होती | C) इससे बैंक बंद होने से बचते हैं | D) इससे कर की दरें गिरती हैं -
आधुनिक कागजी मुद्रा का अपना कोई भौतिक मूल्य (जैसे सोने या चांदी का मूल्य) न होने पर भी यह विनिमय का माध्यम कैसे बनी हुई है?
A) यह बहुत सुंदर दिखती है | B) सरकार की कानूनी गारंटी और केंद्रीय बैंक के वादे के प्रति जनता के गहरे सामूहिक विश्वास के कारण | C) यह प्लास्टिक की बनी होती है | D) इसकी छपाई बहुत महंगी होती है -
व्यापारिक बैंकों की 'प्राथमिक जमा' और 'व्युत्पन्न जमा' में क्या मौलिक तकनीकी अंतर होता है जो बैंकिंग की रीढ़ है?
A) प्राथमिक जमा कागजी होती है | B) प्राथमिक जमा जनता द्वारा नकद रूप में जमा की जाती है जबकि व्युत्पन्न जमा बैंक द्वारा ऋण देने से निर्मित होती है | C) व्युत्पन्न जमा केवल सरकार की होती है | D) दोनों में कोई अंतर नहीं है -
मुद्रा के 'आस्थगित भुगतानों के मान' के कार्य ने आधुनिक वित्तीय और पूंजी बाजार का निर्माण कैसे संभव बनाया?
A) इससे ब्याज दर शून्य हो गई | B) इसने ऋण लेने, देने और भविष्य के अनुबंधों को एक सुरक्षित व निश्चित कानूनी आधार प्रदान किया जिससे बैंकिंग का विकास हुआ | C) इससे शेयर बाजार बंद हो गया | D) इससे सभी लोग तत्काल भुगतान करने लगे -
1930 की महान मंदी के बाद समष्टि अर्थशास्त्र में केंद्रीय बैंक के किस कार्य को देश की स्थिरता के लिए सबसे अनिवार्य माना जाने लगा?
A) नोट छापने के कार्य को | B) मौद्रिक नीति के जरिए साख का प्रभावी नियंत्रण करना ताकि अर्थव्यवस्था में कुल मांग संतुलित बनी रहे | C) सरकार को सलाह देने के कार्य को | D) बैंकों का निरीक्षण करने को -
यदि देश के नागरिक बैंकों से अपनी सारी मांग जमा को अचानक नकद रूप में निकालने का प्रयास करें तो बैंकिंग प्रणाली पर क्या संकट आएगा?
A) बैंक बहुत अमीर हो जाएंगे | B) बैंकों के पास उपलब्ध नकद आरक्षित कोष समाप्त हो जाएंगे और पूरी बैंकिंग प्रणाली ठप हो जाएगी जिसे बैंक रन कहते हैं | C) सरकार नए नोट छापेगी | D) कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा -
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति राजकोषीय नीति (सरकार की कर और व्यय नीति) से कैसे भिन्न और स्वतंत्र होती है समष्टि स्तर पर?
A) मौद्रिक नीति केवल कर बदलती है | B) मौद्रिक नीति ब्याज दरों और मुद्रा की पूर्ति को नियंत्रित करती है जबकि राजकोषीय नीति सरकारी बजट और करों से जुड़ी होती है | C) मौद्रिक नीति केवल विदेशों के लिए है | D) दोनों नीतियां हमेशा एक ही संस्था बनाती है -
वस्तु विनिमय प्रणाली में 'धन या मूल्य के संचय का अभाव' समाज के आर्थिक विकास को किस प्रकार सदियों पीछे धकेल देता था?
A) लोग आलसी हो जाते थे | B) ज्यादातर वस्तुएं नाशवान थीं जिन्हें लंबे समय तक संचित करना असंभव था जिससे भविष्य के लिए बचत और निवेश की प्रक्रिया ठप रहती थी | C) चोरी का डर बहुत अधिक था | D) वस्तुएं बहुत भारी होती थीं
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